देहरादून| राजधानी देहरादून सहित प्रदेश भर के निजी स्कूलों द्वारा की जा रही फीस बढ़ोतरी ने अभिभावकों की कमर तोड़ दी है। हर साल बिना किसी ठोस कारण के बढ़ाई जा रही फीस के खिलाफ अब अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रशासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद स्कूलों की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है, जिसे लेकर सैकड़ों अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे स्कूल
अभिभावकों का कहना है कि पिछले वर्ष जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कोई भी स्कूल तीन साल से पहले फीस में बढ़ोतरी नहीं करेगा। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन इन आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। अभिभावक नेता संजय कन्नौजिया ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इन स्कूलों पर नकेल नहीं कसी गई, तो वे स्कूलों के गेट पर तालाबंदी और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
सियासी गलियारों में भी गरमाया मुद्दा
फीस वृद्धि का यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि अधिकारियों की मिलीभगत से ही स्कूलों के हौसले बुलंद हैं। वहीं, भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सरकार इस मामले में गंभीर है और शिकायत मिलने पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
शिक्षा विभाग की चेतावनी: उल्लंघन पर होगा कड़ा एक्शन
बढ़ते विवाद के बीच माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती ने स्पष्ट किया है कि सरकारी नियमों के अनुसार तीन साल तक फीस नहीं बढ़ाई जा सकती। उन्होंने कहा:
“फीस बढ़ोतरी केवल तय सूचकांक (वर्तमान में लगभग 5.76%) के दायरे में ही हो सकती है। जो स्कूल इसका उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है और जवाब तलब किया गया है।”
शिक्षा निदेशक ने अभिभावकों से सरकारी स्कूलों, विशेषकर ‘अटल उत्कृष्ट विद्यालयों’ पर भरोसा जताने की अपील की है, जहाँ मुफ्त किताबों और ड्रेस के साथ योग्य शिक्षक मौजूद हैं।
बड़े सवाल: क्या केवल कागजों तक सीमित रहेगी कार्रवाई?
सरकारी तंत्र के दावों के बावजूद निजी स्कूलों का प्रबंध तंत्र अपनी कार्यसंस्कृति बदलने को तैयार नहीं है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग केवल नोटिस तक सीमित रहता है या भविष्य में अभिभावकों को राहत दिलाने के लिए कोई ठोस और सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाता है।
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