देहरादून। आगामी मानसून सीजन के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और अनूठी पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई यह व्यवस्था प्रदेश में सुरक्षित आपदा प्रबंधन के लिए एक ‘अभिनव मॉडल’ के रूप में उभर रही है, जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।
टेंडर प्रक्रिया में ही शामिल की गई थी शर्त
यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि चारधाम यात्रा के लिए हेली कंपनियों के चयन की टेंडर प्रक्रिया के दौरान ही एक विशेष प्रावधान रखा गया था। इसके तहत यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाली प्रत्येक हेली कंपनी को 10-10 घंटे के निःशुल्क फ्लाइंग ऑवर (हवाई सेवा) यूकाडा को उपलब्ध कराने की शर्त अनिवार्य की गई थी। वर्तमान में चारधाम यात्रा में आठ हेली कंपनियां सेवाएं दे रही हैं, जिससे प्रशासन को कुल 80 घंटे की मुफ्त हवाई सेवा मिली है।
मेडिकल इमरजेंसी और एयर रेस्क्यू में साबित हो रही ‘जीवनरेखा’
इन निःशुल्क घंटों का उपयोग मुख्य रूप से मेडिकल इमरजेंसी, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे यात्रियों की मदद, एयर रेस्क्यू और दुर्गम क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। यूकाडा के हेड ऑफ ऑपरेशन अमित शर्मा ने बताया कि यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुरक्षा में जीवनरेखा साबित हो रही है। इस वर्ष अप्रैल माह से अब तक केदारनाथ क्षेत्र और अन्य मार्गों से 100 से अधिक बीमार श्रद्धालुओं व जरूरतमंदों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों व अस्पतालों तक पहुँचाया जा चुका है। वहीं, पिछले एक वर्ष में विभिन्न आपदाओं के दौरान 200 से अधिक लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है।
राहत कार्यों में आएगी तेजी > पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, बादल फटने या अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय यह 80 घंटे की मुफ्त हवाई सेवा प्रशासन के लिए संजीवनी का काम करेगी। किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक बिना समय गंवाए तेजी से राहत पहुंचाई जा सकेगी, जिससे आपदा प्रभावित लोगों तक समयबद्ध सहायता मिलने के साथ ही रेस्क्यू अभियानों की गति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
