स्वामी प्रबोधानंद
स्वामी प्रबोधानंद ने चार संतों पर लगाए वसूली के आरोप
हरिद्वार। हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने जूना अखाड़े द्वारा उनके निष्कासन की कार्रवाई को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बड़ी साजिश करार दिया है। हरिद्वार प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने अखाड़े के पदाधिकारियों पर तीखे हमले किए।
‘जब सदस्यता ही नहीं, तो निष्कासन कैसा?’
स्वामी प्रबोधानंद ने अखाड़े के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी जूना अखाड़े में नागा दीक्षा नहीं ली और न ही वे अखाड़े के औपचारिक सदस्य रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “जब मैं अखाड़े का हिस्सा ही नहीं था, तो मुझे निष्कासित करने का कोई औचित्य नहीं बनता। अखाड़े द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण हैं।”
भ्रष्टाचार और धन उगाही के गंभीर आरोप
स्वामी प्रबोधानंद ने जूना अखाड़े के चार प्रभावशाली संतों का नाम लिए बिना उन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि:
-
अखाड़े के कुछ पदाधिकारी महामंडलेश्वरों से अनैतिक रूप से धन की मांग करते हैं।
-
इन गतिविधियों और भ्रष्टाचार का विरोध करने के कारण ही उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा गया है।
-
विरोध की आवाज को दबाने के लिए ही निष्कासन का नाटक किया गया।
केंद्र सरकार से जांच की मांग
स्वामी ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वे हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना अभियान जारी रखेंगे और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
