कार्रवाई
सुराज सेवा दल ने खोला मोर्चा; 24 घंटे में विवादित रिपोर्ट लगाने का आरोप, 3 दिन में कार्रवाई न होने पर दी भूख हड़ताल की चेतावनी
हरिद्वार । धर्मनगरी में नगर निगम के 56 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले ने अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में उबाल ला दिया है। जहाँ एक ओर शासन ने इस मामले में संलिप्त दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी के खिलाफ निलंबन और कठोर विभागीय कार्रवाई कर अपनी मंशा साफ की है, वहीं दूसरी ओर घोटाले की ‘जमीन’ तैयार करने वाले एक पटवारी पर कार्रवाई न होने से सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
24 घंटे में तैयार हुई ‘घोटाले की जमीन’
सुराज सेवा दल ने इस घोटाले की परतों को खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि पटवारी रमेश चंद्र ने महज 24 घंटे के भीतर धारा 143 की विवादित रिपोर्ट लगाकर इस पूरे घोटाले का रास्ता साफ किया था। आश्चर्यजनक पहलू यह है कि इतनी बड़ी अनियमितता में मुख्य भूमिका होने के बावजूद, पटवारी के खिलाफ न तो कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और न ही उसका स्थानांतरण किया गया।
25 साल से एक ही जिले में जमा है ‘दागी’ कर्मचारी!
सुराज सेवा दल के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता में खुलासा किया कि संबंधित पटवारी पिछले 20 से 25 वर्षों से एक ही जिले में तैनात है, जो कि स्थानांतरण नीति का खुला उल्लंघन है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि पटवारी के खिलाफ पूर्व में भी धोखाधड़ी और जालसाजी (IPC की धारा 420, 467, 468) जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे आपराधिक इतिहास वाले कर्मचारी का संवेदनशील पदों पर बने रहना मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
मुख्यमंत्री आवास कूच की चेतावनी
भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर हुए सुराज सेवा दल ने प्रशासन को 3 दिन का अल्टीमेटम जारी किया है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उक्त पटवारी को तत्काल निलंबित कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो हरिद्वार से लेकर राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री आवास तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की जाएगी।
संगठन का बयान: “बड़े अधिकारियों को बलि का बकरा बनाकर असल किरदारों को बचाना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है। जब तक पटवारी रमेश चंद्र पर कार्रवाई नहीं होती, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।” — सुराज सेवा दल
