धामी मंत्रिमंडल
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में आज एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए कई नए और कद्दावर चेहरों को अपनी टीम में शामिल किया है। इस विस्तार के जरिए मुख्यमंत्री ने न केवल संगठन में नई ऊर्जा फूंकने की कोशिश की है, बल्कि राज्य के क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को भी बेहद सूक्ष्मता से साधने का प्रयास किया है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही धामी कैबिनेट की नई तस्वीर साफ हो गई है, जिसमें अनुभवी नेताओं के साथ-साथ क्षेत्रीय क्षत्रपों को भी तरजीह दी गई है।
इस मंत्रिमंडल विस्तार के तहत खजान दास को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे दलित प्रतिनिधित्व को मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं, राम सिंह को भी कैबिनेट में जगह देकर पार्टी ने जमीनी कार्यकर्ताओं को एक सकारात्मक संदेश दिया है। इस फेरबदल में सबसे चौंकाने वाला और बड़ा फैसला भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक की वापसी रहा। कौशिक को मंत्री बनाकर पार्टी आलाकमान ने हरिद्वार और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने का बड़ा दांव खेला है। इनके साथ ही रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा और रुद्रप्रयाग से भारत चौधरी को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिससे गढ़वाल और तराई क्षेत्रों का संतुलन बना रहे।
राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि आगामी चुनावों की चुनौतियों को देखते हुए यह विस्तार भाजपा के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। नए मंत्रियों के चयन में संगठन के प्रति निष्ठा और क्षेत्रीय लोकप्रियता को प्रमुख आधार बनाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर मदन कौशिक जैसे अनुभवी नेताओं की वापसी से सरकार के कामकाज में परिपक्वता आएगी, वहीं प्रदीप बत्रा और भारत चौधरी जैसे चेहरों से युवाओं और क्षेत्रीय मतदाताओं के बीच पार्टी की पैठ और गहरी होगी। कुल मिलाकर, धामी का यह नया मंत्रिमंडल चुनावी मोड में नजर आ रहा है, जिसका मुख्य लक्ष्य विकास के साथ-साथ जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के जरिए सत्ता की राह आसान करना है।
