मजदूर दिवस
देहरादून|आज अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर नगर में श्रमिक एकता का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। विभिन्न श्रमिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और जन संगठनों ने एकजुट होकर रैली निकाली और श्रमिकों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की। हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां लिए मजदूरों ने शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए अपने हक और सम्मान की मांग की।
श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग
रैली के बाद आयोजित सभा में वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकारों को जमकर घेरा। वक्ताओं ने कहा कि देश की गगनचुंबी इमारतों से लेकर बुनियादी ढांचे के विकास तक में मजदूरों का खून-पसीना शामिल है, लेकिन विडंबना यह है कि आज भी बड़ी संख्या में श्रमिक अपने मूलभूत अधिकारों के लिए तरस रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा और नियमित रोजगार जैसी मांगों को प्रमुखता से शासन के सामने रखा।
महंगाई की मार और मजदूरों का जीवन
संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपील की कि सरकार को बढ़ती महंगाई के इस दौर में मजदूर वर्ग के लिए विशेष आर्थिक योजनाएं लानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन नहीं किया गया और श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
एकता ही सबसे बड़ा बल
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने श्रमिक एकता पर जोर देते हुए कहा, “जब तक मजदूर संगठित नहीं होगा, तब तक शोषण जारी रहेगा।” सभा में उपस्थित सभी मजदूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में एकजुटता का संकल्प लिया और अपने अधिकारों के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने का आह्वान किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पदाधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
