गोदियाल
देहरादून। उत्तराखंड में धामी मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही राज्य में सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं पर कड़े सवाल खड़े करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर निशाना साधा है। गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के शपथ लेने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के लिए प्रदेश को एक लंबा और अनावश्यक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्षों की देरी के बाद लिए गए इस फैसले से सरकार की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लगता है, हालांकि उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए सभी नए मंत्रियों को उनके नए उत्तरदायित्व के लिए बधाई भी दी।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मंत्रिमंडल के गठन में शामिल चेहरों की पृष्ठभूमि पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में अन्य दलों से आए नेताओं को मूल कार्यकर्ताओं की तुलना में अधिक तरजीह दी जा रही है, जिससे सत्ताधारी दल के भीतर पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष व्याप्त है। गोदियाल ने इसे ‘आयातित नेताओं का वर्चस्व’ करार देते हुए कहा कि पार्टी के भीतर का यह असंतुलन आने वाले समय में भाजपा के लिए चुनौती बनेगा। इसके साथ ही उन्होंने नए मंत्रियों से उम्मीद जताई कि वे केवल पद का उपभोग न कर जनता की उन अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे, जो लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं।
दोहराई गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग
अपने संबोधन में गणेश गोदियाल ने राज्य के सबसे संवेदनशील मुद्दे ‘गैरसैंण’ को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने मांग दोहराई कि गैरसैंण को अविलंब राज्य की स्थायी राजधानी घोषित किया जाना चाहिए और नवगठित कैबिनेट की पहली ही बैठक में इस पर कोई ठोस और ऐतिहासिक निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रतीकात्मक राजनीति से उत्तराखंड का भला नहीं होने वाला है। हालांकि, अपने बयान के अंत में उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाते हुए सभी नवनियुक्त मंत्रियों को शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त की कि नई टीम व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राज्यहित में कड़े और जनपक्षीय फैसले लेगी।
