CM धामी
24 अप्रैल से टिहरी में सजेगी पहली ‘प्रवासी पंचायत’, अब पहाड़ लौटेंगे अपने
देहरादून : उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कार्यकाल के 4 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए हैं। इस उपलक्ष्य में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत जहाँ जन समस्याओं का समाधान किया जा रहा है, वहीं प्रदेश की सबसे बड़ी चुनौती ‘पलायन’ को रोकने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग के माध्यम से अब प्रदेश के सभी जिलों में ‘प्रवासी पंचायत’ का आयोजन किया जाएगा, जिसकी शुरुआत आगामी 24 अप्रैल को टिहरी जिले से होने जा रही है।
4 सालों में 6 हजार लोगों की हुई ‘घर वापसी’
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में काम कर रहे पलायन निवारण आयोग के आंकड़े उत्साहजनक हैं। पिछले 4 वर्षों में प्रदेश के 6,000 से अधिक प्रवासियों ने ‘रिवर्स पलायन’ कर अपने पैतृक गाँवों में स्वरोजगार शुरू किया है। इसी सफलता से उत्साहित होकर धामी सरकार ने अब सीधे प्रवासियों के बीच पहुँचने का निर्णय लिया है। नवंबर तक प्रदेश के सभी 13 जिलों में जिला स्तर पर इन पंचायतों का आयोजन पूरा कर लिया जाएगा।
सफल प्रवासी बनेंगे ‘रोल मॉडल’
इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य प्रवासियों को अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करना है। आयोग के उपाध्यक्ष के अनुसार, इन पंचायतों में उन प्रवासियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा जो कोविड काल के बाद वापस लौटे और आज कृषि, बागवानी, मशरूम उत्पादन, होमस्टे और डेयरी जैसे क्षेत्रों में सफल उद्यमी बन चुके हैं। ये सफल प्रवासी अन्य लोगों के लिए ‘रोल मॉडल’ बनकर उन्हें स्वरोजगार के गुर सिखाएंगे।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी सरकारी योजनाएं
प्रवासी पंचायतों में जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे, जो प्रवासियों को सरकार की स्वरोजगार योजनाओं, सब्सिडी और ऋण सुविधाओं की विस्तार से जानकारी देंगे। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने जिस तरह देश-विदेश के बड़े निवेशकों को आमंत्रित किया था, ठीक उसी तर्ज पर अब गाँव के प्रवासियों को स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि पहाड़ के युवाओं को रोजगार की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर न जाना पड़े और उत्तराखंड के वीरान हो चुके गाँव एक बार फिर गुलज़ार हो सकें।
