गुलदार पीड़ितों के घर जाने के सवाल पर बोले मंत्री— ‘हर मृतक के घर जाना संभव नहीं’; पूर्व वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने मांगा इस्तीफा।
श्रीनगर/देहरादून। उत्तराखंड के स्वास्थ्य एवं वन मंत्री सुबोध उनियाल का वन्यजीव हमलों के पीड़ितों को लेकर दिया गया एक बयान राज्य में बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। श्रीनगर बेस अस्पताल के निरीक्षण के दौरान जब पत्रकारों ने मंत्री से सवाल किया कि क्या वे क्षेत्र में लगातार हो रहे गुलदार (तेंदुए) के हमलों में मारे गए लोगों और पीड़ित परिवारों से मिलने उनके घर जाएंगे, तो इस पर मंत्री ने साफ कहा कि यह संभव नहीं है कि वे हर गुलदार हमले में मारे गए व्यक्ति के घर जाएं।
मंत्री सुबोध उनियाल ने अपनी बात रखते हुए आगे कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में वन विभाग के उच्चाधिकारियों, विशेष रूप से डीएफओ (DFO) को सख्त निर्देश दिए गए हैं। विभाग के अधिकारी घटनाओं के तत्काल बाद पीड़ित परिवारों तक पहुंच रहे हैं और हरसंभव मदद कर रहे हैं। हालांकि, मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष को सरकार पर चौतरफा हमला बोलने का बड़ा मौका मिल गया है।
जनभावनाओं को आहत करने वाला बयान: आलोचक
इस मामले पर राजनीतिक जानकारों और आलोचकों का कहना है कि चुनाव के दौरान तमाम जनप्रतिनिधि जनता के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहने का बड़ा वादा करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान आम जनता की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाते हैं। जानकारों का मानना है कि पहाड़ों में वन्यजीव और मानव संघर्ष जैसी संवेदनशील घटनाओं पर आया यह बयान सरकार की छवि को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
हरक सिंह रावत ने खोला मोर्चा, इस्तीफे की मांग की
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश के पूर्व वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने वर्तमान सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। डॉ. रावत ने कहा कि वन मंत्री का यह बयान उत्तराखंड की आम जनता की उम्मीदों और उनकी तकलीफों के बिल्कुल विपरीत है। इससे सरकार की संवेदनशीलता और उसकी नीयत पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व वन मंत्री ने सुबोध उनियाल से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है।
