मुस्लिम समुदाय
जमीयत उलेमा देहरादून का बड़ा फैसला: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने के लिए उत्तराखंड में चलेगी प्रदेशव्यापी मुहिम; सड़कों पर कुर्बानी न करने और सोशल मीडिया पर वीडियो न डालने की हिदायत
देहरादून : आगामी त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर जमीयत उलेमा जिला देहरादून ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा दार-ए-अरकम में आयोजित इस बैठक में संगठन ने मुस्लिम समाज से देश के कानून, शरई हिदायतों और आपसी सामाजिक सौहार्द का पूरी तरह पालन करते हुए त्योहार मनाने की पुरजोर अपील की है। इसी बैठक में एक बड़ा और ऐतिहासिक ऐलान करते हुए संगठन ने कहा कि वे उत्तराखंड की धरती से गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ का दर्जा दिलाने के लिए एक बड़ा प्रदेशव्यापी अभियान (मुहिम) शुरू करने जा रहे हैं।
जमीयत उलेमा की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि कुर्बानी इस्लाम का एक पवित्र और अहम इबादती अमल है, जिसका एकमात्र उद्देश्य अल्लाह की रज़ा और रजामंदी हासिल करना है। यह किसी भी प्रकार के दिखावे, प्रदर्शन या दूसरों को ठेस पहुंचाने का जरिया नहीं होना चाहिए। मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए संगठन ने कहा कि देवभूमि के हर नागरिक की यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसा कोई भी कदम न उठाए जिससे समाज में किसी भी तरह का विवाद, तनाव या गलतफहमी पैदा हो।
जमीयत उलेमा की जरूरी गाइडलाइंस
चिन्हित स्थान: कुर्बानी केवल निर्धारित और वैध निजी या प्रशासनिक स्थानों पर ही की जाए। सड़क, गली, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर इस पर पूरी तरह रोक रहे।
सोशल मीडिया पर बैन: कुर्बानी के फोटो और वीडियो किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कतई साझा (शेयर) न किए जाएं।
स्वच्छता सर्वोपरि: कुर्बानी के बाद खून, अवशेष और गंदगी को तत्काल दफन या साफ किया जाए। नालियों या सड़कों पर गंदगी फैलाना इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है।
प्रशासन का सहयोग: पुलिस और प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत पालन हो। अफवाहों और भड़काऊ बातों से दूर रहकर अमन-चैन बनाए रखें।
जमीयत ने विशेष रूप से मस्जिदों के इमामों और खतीबों से गुजारिश की है कि वे जुमे और ईद के खुत्बों (भाषणों) में आम जनता को अमन, भाईचारे और जिम्मेदार सामाजिक व्यवहार का संदेश दें। संगठन ने साफ किया कि स्वच्छता और पड़ोसियों की सुविधा का ध्यान रखना हर सच्चे मुसलमान का मजहबी फर्ज है। किसी भी अप्रिय घटना या अफवाह की स्थिति में कानून को हाथ में लेने के बजाय सीधे पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सूचित किया जाए।
बैठक में ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण विमर्श में जमीयत उलेमा जिला देहरादून के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल सलाम कासमी, शहर अध्यक्ष मुफ्ती अयाज़, जनरल सेक्रेटरी हाफिज आबिद, मुफ्ती वासिल क़ासमी, मुफ्ती हुजैफा क़ासमी, मुफ्ती राशिद, मौलाना गुलशेर, मौलाना मुतायब, मुफ्ती अरशद, मुफ्ती खुशनुद, मुफ्ती बुरहान रब्बानी, मौलाना एजाज़ क़ासमी, मास्टर अब्दुल सत्तार, मौलाना महताब, कारी अबुल फ़ज़ल, मौलाना सलमान नदवी, मौलाना अब्दुल वाजिद, कारी फरहान, मोहम्मद शाह नज़र और मुफ्ती नसीम सहित क्षेत्र के कई गणमान्य उलेमा और प्रबुद्ध जन मौजूद रहे।
