कैलापीर देवता
टिहरी गढ़वाल।जनपद के देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। हिंडोलाखाल ब्लॉक की पट्टी में स्थित प्राचीन मेला स्थल डाडापानी कैलापीर मंदिर में तीन दिवसीय विशेष पूजा-अर्चना का समापन श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। भव्य मंदिर निर्माण के बाद आयोजित इस पहले मेले में भक्तों का भारी हुजूम देखने को मिला।
भव्य पदयात्रा और डंडा पानी यात्रा का आकर्षण
इस वर्ष मेले की रौनक कैलापीर घाटी से शुरू हुई कई किलोमीटर लंबी पदयात्रा रही। देवता के पश्वा, पारंपरिक नेजा-निशान और ढोल-दमाऊं की थाप पर श्रद्धालु ‘डंडा पानी यात्रा’ के साथ मुख्य मंदिर स्थल पहुंचे। ग्राम सभा कफलड, उछा और त्याड सहित कई गांवों के सामूहिक सहयोग से निर्मित भव्य मंदिर में विधिवत पूजा और हवन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं ये मेले: उत्तम सिंह असवाल
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे जिला कांग्रेस कमेटी देवप्रयाग के अध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल ने क्षेत्रवासियों को मंदिर निर्माण की बधाई दी। उन्होंने कहा, “ऐसे मेले हमारी प्राचीन संस्कृति और पूर्वजों की परंपराओं के जीवंत प्रतीक हैं, जो समाज को एकता के सूत्र में बांधते हैं।” उन्होंने मंदिर तक सुगम आवाजाही के लिए सड़क निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सहयोगियों का हुआ सम्मान
मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंदन सिंह रतकली, सचिव रविंद्र सिंह चंद एवं मुख्य सलाहकार राजेंद्र सिंह चंद ने मंदिर निर्माण में रात-दिन एक करने वाले श्रमिकों और दानदाताओं का आभार व्यक्त किया। इस दौरान समिति ने सहयोगियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया।
इस धार्मिक अनुष्ठान में कमल सिंह रतगली, जीत चंद, दयाल चंद, दिनेश नंद, विक्रम सिंह रतकली, कुशपाल सिंह, कृपाल सिंह, मोहन सिंह, जयपाल सिंह, जगत सिंह राणा, गोविंद सिंह राणा, गंगाप्रसाद जोशी, डब्बी देवी और भगवान सिंह सहित क्षेत्र के पुजारीगण, बाजगीर भाई और सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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