आपदा से उबरता धराली
प्रमुख बिंदु
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आपदा से उबरता धराली: 5 अगस्त 2025 को आई भीषण आपदा के एक साल बाद धराली, हर्षिल और भटवाड़ी में जिंदगी फिर से पटरी पर लौट आई है।
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करोड़ों के विकास कार्य: भागीरथी घाटी में पिछले एक साल के दौरान 33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है।
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राहत और पुनर्वास: प्रभावित परिवारों की मदद के लिए 17 करोड़ रुपये से अधिक सीधे वितरित किए गए, जबकि 16 करोड़ रुपये विकास और पुनर्वास पर खर्च हुए।
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जीवन और आजीविका बहाल: उजड़े बागों का मुआवजा, किसानों को बीज-पौधे, पशुपालन को बढ़ावा और मजबूत बुनियादी ढांचे से क्षेत्र फिर आबाद हो रहा है।
उत्तरकाशी | ठीक एक साल पहले, 5 अगस्त 2025 का वह दिन उत्तरकाशी जिले के धराली के लिए किसी प्रलय से कम नहीं था। उस एक पल ने घरों, दुकानों, बाग-बगीचों और अनगिनत उम्मीदों को मलबे में तब्दील कर दिया था। चारों तरफ तबाही के निशान और सन्नाटा पसरा हुआ था, जिसकी दर्दनाक तस्वीरों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन आज, एक साल के भीतर ही धराली ने तबाही के उस काले अध्याय को पीछे छोड़ते हुए साहस, संघर्ष और पुनर्निर्माण की एक नई इबारत लिख दी है।
आज मलबे के ढेर से रास्ते निकल आए हैं, उजड़े हुए बाग फिर से हरे-भरे हो गए हैं और धराली, हर्षिल व भटवाड़ी जैसे क्षेत्र एक बार फिर पूरी तरह आबाद हो रहे हैं। सड़कें खुल चुकी हैं, बिजली-पानी की सुचारू व्यवस्था बहाल हो चुकी है और खेतों में एक बार फिर फसलें लहलहाने लगी हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संभाला था मोर्चा
इस ऐतिहासिक कायापलट के पीछे राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का वह नेतृत्व है, जिन्होंने आपदा के पहले दिन से ही खुद मैदान में उतरकर मोर्चा संभाला था। सरकार के प्रभावी प्रयासों का नतीजा रहा कि राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती गई।
पिछले एक साल में भागीरथी घाटी में कुल 33 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की जा चुकी है:
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प्रत्यक्ष सहायता: लगभग 17 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सीधे तौर पर आपदा प्रभावित परिवारों की मदद और मुआवजे के रूप में दी गई।
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पुनर्निर्माण कार्य: लगभग 16 करोड़ रुपये क्षेत्र के विकास, आधारभूत ढांचे को दुरुस्त करने और पुनर्वास कार्यों पर खर्च किए गए।
लौटी आजीविका और सुरक्षित भविष्य
सरकार ने न सिर्फ भौतिक नुकसान की भरपाई की, बल्कि लोगों की आजीविका को भी दोबारा पटरी पर लाया। उजड़े हुए बागों के लिए उचित मुआवजा, किसानों को उन्नत बीज और पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ पशुपालन को बढ़ावा दिया गया। इसके अलावा सिंचाई, पेयजल और बिजली की लाइनों को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया गया है। भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मजबूत बाढ़ सुरक्षा कार्य भी किए गए हैं, ताकि क्षेत्र को भविष्य की आपदाओं से सुरक्षित रखा जा सके। इन तमाम ठोस कदमों से पर्यटन गतिविधियां भी फिर से शुरू हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
