नैनीताल दुर्घटना
मेरठ के एक ही परिवार के 29 लोग लौट रहे थे घर, हादसे में चालक समेत 27 घायल; आधा दर्जन की हालत बेहद नाजुक
कालाढूंगी/हल्द्वानी। नैनीताल की खूबसूरत वादियों में बिताए पलों की खुशनुमा यादें समेटकर उत्तर प्रदेश के मेरठ लौट रहे एक ही परिवार के 29 लोगों के लिए बुधवार की देर शाम जिंदगी का सबसे बड़ा दुःस्वप्न बन गई। कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग पर ‘प्रिया बैंड’ (लाल मिट्टी) के पास अचानक ब्रेक फेल होने से एक टेंपो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर गहरी खाई की ओर लटक गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी का शीशा टूट गया और दो महिलाएं—नाज़मीन और फरद बेगम—अपने ही परिजनों के सामने सीधे गहरी खाई में जा गिरीं, जिससे दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। पीछे बैठे रिश्तेदारों ने उनका हाथ थामकर बचाने की आखिरी कोशिश भी की, लेकिन रफ्तार और बदकिस्मती के आगे वे नाकाम रहे। हादसे में चालक समेत 27 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
चीख-पुकार के बीच देवदूत बने स्थानीय लोग
हादसे के तुरंत बाद धमोला निवासी अजय और जैक्सन स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे और अपनी जान की परवाह न करते हुए राहत कार्य शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना के बाद मौके पर गगनभेदी चीख-पुकार मची हुई थी, बच्चे और महिलाएं बुरी तरह सहमे हुए थे। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। स्थानीय युवाओं और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से कटर और रस्सियों की मदद से गाड़ी में फंसे 27 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। अजय और जैक्सन ने तत्परता दिखाते हुए एम्बुलेंस का इंतजार किए बिना अपनी ही कार से गंभीर घायलों को सुशीला तिवारी अस्पताल (STH) हल्द्वानी पहुंचाया।
हाई अलर्ट पर सुशीला तिवारी अस्पताल (STH)
हादसे की भयावहता को देखते हुए हल्द्वानी एसटीएच प्रशासन को तुरंत हाई अलर्ट पर रखा गया। सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी खुद हालात का जायजा लेने अस्पताल पहुंचे। अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में वार्ड खाली करवाए और डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की अतिरिक्त टीमें तैनात कर दीं। एसटीएच के चिकित्सक डॉ. दीपक जोशी के अनुसार, अस्पताल में कुल 21 घायलों को लाया गया है, जिनमें 9 महिलाएं, 10 पुरुष और 2 मासूम बच्चे शामिल हैं। इनमें से आधा दर्जन यात्रियों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं, जिनका सीटी स्कैन कराया गया है। सभी की हालत नाजुक बनी हुई है, जबकि 6 अन्य घायलों का इलाज कालाढूंगी के स्थानीय अस्पताल में चल रहा है।
परिवहन व्यवस्था और ओवरलोडिंग पर उठे गंभीर सवाल
इस बड़े हादसे ने उत्तराखंड की परिवहन व्यवस्था और चेकिंग चौकियों की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त टेंपो ट्रैवलर की क्षमता केवल 24 सीटों की थी, लेकिन उसमें क्षमता से अधिक यानी 29 सवारियां बैठाई गई थीं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह ओवरलोड वाहन नैनीताल से चलकर कालाढूंगी तक पहुंच गया, लेकिन रास्ते में किसी भी पुलिस चौकी या परिवहन विभाग (RTO) के अधिकारियों ने इसे रोकने या जांचने की जहमत नहीं उठाई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पर्यटन सीजन में पहाड़ों पर ओवरलोडिंग और अनफिट वाहनों का संचालन आम बात है, और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने रहते हैं।
