कोसी नदी
रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड के रामनगर में कोसी नदी से खनन निकासी को लेकर विवाद गहरा गया है। तराई पश्चिमी वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा 10-टायरा वाहनों के संचालन पर अचानक लगाई गई रोक के विरोध में गुरुवार को भारी संख्या में ट्रांसपोर्टरों ने अधिकारियों का घेराव किया। वाहन स्वामियों ने इस निर्णय को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे।
अधिकारियों के घेराव से मचा हड़कंप
ट्रांसपोर्ट यूनियन के बैनर तले एकजुट हुए वाहन स्वामियों ने तराई पश्चिमी वन प्रभाग की एसडीओ किरण शाह और वन विकास निगम के डीएलएम मुदित आर्य का घेराव किया। ट्रांसपोर्टरों ने विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि पूर्व में पंजीकृत 10-टायरा वाहनों को तत्काल प्रभाव से खनन कार्य में वापस शामिल किया जाए।
रोजी-रोटी और बैंक की किश्तों का संकट
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उन्होंने बैंक से भारी-भरकम लोन लेकर ये वाहन खरीदे थे। वर्तमान सत्र में विभाग ने खुद इन वाहनों का पंजीकरण किया था, लेकिन अब अचानक रोक लगा दी गई है। इससे न केवल उनके सामने परिवार के भरण-पोषण (रोजी-रोटी) का संकट खड़ा हो गया है, बल्कि वाहनों की मासिक किश्त (EMI) चुकाना भी नामुमकिन हो गया है।
अवैध खनन के आरोपों पर पलटवार
विभाग का तर्क है कि 10-टायरा वाहनों के जरिए अवैध खनन और वन संपदा को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। इस पर ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष हरदीप सिंह ने तीखा पलटवार करते हुए कहा: “अगर 10-टायरा वाहनों से अवैध खनन हो रहा है, तो जब अन्य छोटे वाहनों से खुलेआम खनन होता था तब विभाग कहाँ था? अधिकारी अवैध खनन का बहाना बनाकर हमारा उत्पीड़न कर रहे हैं। या तो हमारे वाहनों को चलने की अनुमति दें, वरना कोसी नदी में खनन पूरी तरह बंद कर दें।”
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अधिकारियों का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएलएम मुदित आर्य ने बताया कि अवैध खनन की लगातार मिल रही शिकायतों के कारण इन वाहनों को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि ट्रांसपोर्टरों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को उच्चाधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा और जल्द ही इस समस्या का कोई उचित समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
