हरक सिंह रावत
भाजपा में अंतर्कलह का ‘महाभारत’
देहरादून | उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के भीतर मची रार अब सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक पहुंच गई है। ‘अनुशासन’ का दम भरने वाली पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष का लावा अब फूटने लगा है, जिसने विपक्ष को सरकार को घेरने का सुनहरा मौका दे दिया है।
सोशल मीडिया पर झलका दर्द
सियासी हलचल तब तेज हो गई जब बद्री-केदार मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय की नाराजगी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हुई। उनके तीखे तेवरों ने न केवल संगठन के भीतर की दरार को उजागर किया, बल्कि यह भी संकेत दे दिए कि सब कुछ ठीक नहीं है।
नेताओं के बागी सुर: लंबी है फेहरिस्त
पार्टी के भीतर गुटबाजी केवल एक नेता तक सीमित नहीं है। जानकारों की मानें तो भाजपा इस वक्त कई खेमों में बंटी नजर आ रही है:
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विधायकों का घेरा: दिलीप रावत और अरविंद पांडेय जैसे विधायक अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुके हैं।
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दिग्गजों की रार: पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और अनिल बलूनी जैसे कद्दावर नेताओं के बयानों ने भी समय-समय पर सियासी पारे को गरमाया है।
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भीतरी असंतोष: रामशरण नौटियाल और अजेंद्र अजय जैसे नेताओं की सक्रियता और बयानबाजी ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है।
विपक्ष हमलावर, हरक सिंह रावत का पलटवार
भाजपा की इस अंदरूनी कलह पर कांग्रेस ने चुटकी लेना शुरू कर दिया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो पार्टी खुद को ‘कैडर बेस’ बताती थी, आज वह ताश के पत्तों की तरह बिखरी हुई है। उन्होंने कहा कि जब सत्ताधारी दल के विधायक ही अपनी सरकार को सुरक्षित महसूस नहीं करते, तो जनता का क्या होगा।
चुनाव से पहले बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा ने समय रहते इस गुटबाजी पर लगाम नहीं लगाई, तो विधानसभा चुनाव में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक तरफ विपक्ष इस मुद्द को भुनाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ अपनों को एक मंच पर लाना मुख्यमंत्री और संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
