जिला कलेक्ट्रेट घेराव
45 साल का इंतज़ार: भूमि धरी अधिकार के लिए कलेक्ट्रेट पर गरजे टिहरी विस्थापित
हरिद्वार | विस्थापन के साढ़े चार दशक बीत जाने के बाद भी अपने बुनियादी हक के लिए टिहरी विस्थापितों का संघर्ष जारी है। सोमवार को हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत के नेतृत्व में हजारों विस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट का घेराव किया और ज़ोरदार धरना प्रदर्शन किया।
प्रशासन की कोशिशें रहीं नाकाम
धरना स्थल पर मौजूद एसडीएम और एडीएम ने घंटों तक ग्रामीणों को समझाने और धरना समाप्त करने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि अब उन्हें कोरे आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन का मालिकाना हक चाहिए।
डीएम के आश्वासन पर शांत हुए ग्रामीण
तनाव बढ़ता देख जिलाधिकारी मयूर दीक्षित स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से सीधी वार्ता की और उनकी मांगों से संबंधित ज्ञापन स्वीकार किया। डीएम के ठोस आश्वासन के बाद ही ग्रामीण शांत हुए।
अधिकारियों पर बरसीं विधायक
विधायक अनुपमा रावत ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “पिछले कई दशकों से टिहरी विस्थापित भूमि स्वामित्व के अधिकार के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अधिकारी केवल मीटिंगों का दौर चलाकर और झूठे आश्वासन देकर मामले को टाल रहे हैं। अब विस्थापितों के सब्र का बांध टूट चुका है।”
