भोजन माताओं का धारण
ऊधम सिंह नगर । खटीमा में अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही भोजन माताओं का धैर्य अब जवाब दे गया है। गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में भोजन माताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तहसील परिसर का घेराव किया। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी अनदेखी जारी रखी, तो यह आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले 20-21 वर्षों से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रही हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल ₹3,000 प्रति माह (लगभग ₹100 प्रतिदिन) का मानदेय दिया जाता है, जो वर्तमान महंगाई में मजाक के समान है। उनकी मांग है कि उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देते हुए न्यूनतम वेतन ₹26,000 निर्धारित किया जाए।
नई नीति से सेवा समाप्ति का डर
भोजन माताओं ने 31 जनवरी 2024 के उस शासनादेश (संख्या 847) को तत्काल रद्द करने की मांग की है, जिसमें छात्र संख्या कम होने पर भोजन माताओं को सेवा से हटाने का प्रावधान है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि छात्र संख्या घटने के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं, तो उसकी सजा उन्हें क्यों दी जा रही है।
मुख्य मांगें :
-
राज्य कर्मचारी का दर्जा: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित किया जाए।
-
वेतन वृद्धि: ₹3,000 के मानदेय को बढ़ाकर ₹26,000 किया जाए।
-
सामाजिक सुरक्षा: भविष्य निधि (PF) और ई०एस०आई० (ESI) की सुविधा।
-
अन्य लाभ: मातृत्व अवकाश, ड्रेस-जूते और सेवानिवृत्ति पर ₹5 लाख की सहायता।
-
पूर्ण वेतन: 11 महीने के बजाय पूरे 12 महीने का मानदेय।
“हम वर्षों से बच्चों का पेट भर रही हैं, लेकिन आज हमारे अपने बच्चों के सामने संकट खड़ा है। ₹100 में घर चलाना नामुमकिन है। जब तक सरकार हमारी मांगे नहीं मानती, हड़ताल जारी रहेगी।” — प्रदर्शनकारी भोजन माता
प्रदेश व्यापी आंदोलन की सुगबुगाहट
खटीमा ही नहीं, बल्कि रामनगर, नैनीताल और पिथौरागढ़ में भी 2 फरवरी से ही अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। स्कूलों में ‘मिड-डे मील’ व्यवस्था प्रभावित होने लगी है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
