अग्निवीर
ऊधमसिंह नगर: ऊधमसिंह नगर जनपद के शक्तिफार्म क्षेत्र अंतर्गत पिपलिया गांव के रहने वाले 18 वर्षीय अग्निवीर जवान रमनजीत सिंह का शुक्रवार को उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। देश सेवा का जज्बा दिल में लिए महज 18 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह देने वाले इस युवा जांबाज की असमय मृत्यु से पूरे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई है। जवान की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने नम आंखों से शहीद वीर को अपनी अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।
ट्रेनिंग पूरी होने में बचा था सिर्फ एक हफ्ता
पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रमनजीत सिंह का चयन पिछले वर्ष भारतीय सेना की ‘अग्निपथ योजना’ के तहत हुआ था। वह वर्तमान में महाराष्ट्र के पुणे स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में अपनी कठिन ट्रेनिंग ले रहे थे। परिजनों ने बताया कि उनकी ट्रेनिंग पूरी होने में केवल एक सप्ताह का ही समय शेष रह गया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर रमनजीत को सेना के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी बुधवार को उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम विदाई
सेना के विशेष वाहन से जैसे ही जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पिपलिया पहुँचा, पूरा माहौल गमगीन हो गया और परिजनों की चीख-पुकार से वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। बनबसा छावनी से विशेष रूप से पहुँची राजपूत रेजीमेंट की सैन्य टुकड़ी ने जवान रमनजीत सिंह को पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (सलामी) दिया। इस दौरान श्मशान घाट से लेकर पूरे क्षेत्र में ‘भारत माता की जय’ और ‘अग्निवीर रमनजीत सिंह अमर रहें’ के गगनभेदी नारे गूंजते रहे। बड़े भाई ने मुखाग्नि देकर रमनजीत के पार्थिव शरीर को पंचतत्व में विलीन किया।
बचपन से ही था देश सेवा का अटूट जज्बा
एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले रमनजीत सिंह के पिता जोगेंद्र सिंह एक निजी फैक्ट्री में काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि उनके बड़े भाई गांव में ही खेती संभालते हैं। परिजनों ने रुंधे गले से बताया कि रमनजीत का बचपन से ही एकमात्र सपना भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की रक्षा करना था। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर इस सपने को पूरा भी किया, लेकिन उनकी असमय मृत्यु ने पूरे हंसते-खेलते परिवार और क्षेत्र को कभी न भूलने वाला गहरा जख्म दे दिया है।
