ब्लॉक प्रमुख सहित कई संगठनों ने दिया समर्थन; ग्रामीणों ने दी 2027 चुनाव में ‘चोट’ की चेतावनी, अब कोर्ट से न्याय की आस।
रामनगर। ग्राम पूछड़ी में वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाए जाने के बाद प्रभावित परिवारों का दर्द अब जनांदोलन का रूप ले रहा है। कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे रातें गुजार रहे पीड़ित परिवारों के समर्थन में सोमवार को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने तहसील परिसर में एकदिवसीय धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और वन विभाग की ‘बुलडोजर कार्रवाई’ की तीखी निंदा करते हुए तत्काल पुनर्वास की मांग की।
मासूमों के साथ दर-दर भटक रहे परिवार
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीब परिवारों को बेघर कर दिया गया है। आज ये परिवार अपने छोटे बच्चों के साथ भीषण ठंड में रहने को मजबूर हैं। ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी और ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी ने इस लड़ाई को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि मानवता के नाते सरकार को पहले इनके रहने का इंतजाम करना चाहिए था।
‘न योजनाएं मिलीं, न हक’—अब न्यायालय की शरण
मालिकाना हक संघर्ष समिति के अध्यक्ष एस. लाल सहित अन्य वक्ताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ही ग्राम में रहने वाले लोगों के साथ भेदभाव हो रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिले, ग्राम प्रधान चुनने का अधिकार मिले और क्षेत्र पंचायत की बैठकों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अब उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है और वे न्याय के लिए माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
2027 चुनाव का बहिष्कार और बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रभावितों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो रामनगर में एक ऐतिहासिक आंदोलन छेड़ा जाएगा। ग्रामीणों ने हुंकार भरते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में वन ग्रामों के वोट राजनीतिक पार्टियों को कड़ा सबक सिखाएंगे। उन्होंने इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई करार दिया।
4 जनवरी को जागरूकता शिविर पर नजरें
आगामी 4 जनवरी को रामनगर डिग्री कॉलेज के सभागार में एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन होने जा रहा है। इसमें हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice), जिला जज एवं कई अन्य न्यायाधीशों के पहुंचने की संभावना है। संघर्ष समिति ने अधिक से अधिक लोगों से इस शिविर में शामिल होने की अपील की है ताकि वे अपनी कानूनी स्थिति और अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
