व्यापार मंडल कार्यालय से वन विभाग तक निकाली आक्रोश रैली, पीड़ित परिवारों ने पुनर्वास की मांग की; विधायक-सांसद पर भ्रमित करने का आरोप
रामनगर: बीती 7 दिसंबर को ग्राम पूछड़ी में वन भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 52 अवैध अतिक्रमणों को तोड़ा गया था। इस कार्रवाई से प्रभावित पीड़ित परिवार एवं विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने मंगलवार को कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विरोध रैली और नारेबाजी
विरोध स्वरूप, मंगलवार को व्यापार मंडल कार्यालय से तराई पश्चिमी वन प्रभाग के कार्यालय तक पीड़ित परिवारों और विभिन्न संगठनों के लोगों ने एक आक्रोश रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने सरकार और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
वन परिसर में आयोजित जनसभा में वक्ताओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीब लोगों को बेघर किया जा रहा है और उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है।
पुनर्वास और कानून पर अमल की मांग
वक्ताओं ने मांग की अतिक्रमण हटाने से पहले सरकार को पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। वन अधिकार कानून 2006 पर अमल किया जाना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों पर नाराजगी
संगठनों ने रामनगर विधायक दीवान सिंह बिष्ट एवं सांसद अनिल बलूनी के खिलाफ भी नाराजगी जताई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ये दोनों जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवारों को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भाजपा के एजेंट भी पीड़ित परिवारों को बहकाने का काम कर रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन के दौरान सांसद अनिल बलूनी को उनके चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों पर अमल करने की याद दिलाई गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो डीएफओ (DFO) का घेराव करते हुए उनका आना-जाना भी बंद कर दिया जाएगा।
