पीड़ित मां
देहरादून।पिछले वर्ष 23 जून 2025 को हुए भीषण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) में लापता हुई अपनी बेटी को खोजने और न्याय पाने के लिए दिल्ली की रहने वाली श्वेता शर्मा आज भी भटक रही हैं। श्वेता शर्मा ने पुलिस की जांच प्रणाली और डीएनए रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पुलिस ने महज एक कटे हुए पैर के डीएनए के आधार पर उनकी बेटी को मृत मान लिया है, जबकि एक मां के रूप में उन्हें आज भी पूरा विश्वास है कि उनकी बेटी जीवित है।
सिर्फ एक पैर मिलने से कैसे मान लूं कि बेटी नहीं रही: श्वेता शर्मा
अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए पीड़ित मां श्वेता शर्मा ने कहा, “मेरी बेटी की गुमशुदगी के मामले पर पुलिस दोबारा काम शुरू करे। सिर्फ एक कटा हुआ पैर मिलने से मैं यह कैसे स्वीकार कर लूं कि मेरी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही? मुझे आज भी पूरी उम्मीद है कि मेरी बेटी जिंदा है।” उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि पूर्व में आई डीएनए रिपोर्ट की दोबारा किसी दूसरी प्रतिष्ठित लैब से जांच कराई जाए और उनकी बेटी को तलाशने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन या खोज अभियान को फिर से शुरू किया जाए।
डीएनए रिपोर्ट में लगे 55 दिन, केस बंद करने की तैयारी में पुलिस
श्वेता शर्मा ने आरोप लगाया कि घटना के बाद डीएनए रिपोर्ट आने में ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम को 55 दिन का लंबा समय लग गया। इतनी देरी से रिपोर्ट आने के बाद अब पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील केस को बंद करने की बात कह रहा है। पीड़ित परिवार ने अब सरकार, पुलिस महानिदेशक और न्यायालय से इस पूरे मामले में दखल देने की अपील की है। परिवार की स्पष्ट मांग है कि जांच को दोबारा खोला जाए और सभी पहलुओं की निष्पक्ष व वैज्ञानिक पड़ताल की जाए, ताकि इस दर्दनाक घटना के पीछे की असली सच्चाई सामने आ सके और एक बेबस मां को न्याय मिल सके।
