उत्तराखंड क्रांति दल
गैरसैंण में आयोजित कार्यक्रम में गरजे यूकेडी अध्यक्ष सुरेन्द्र कुकरेती, कहा- ‘पहाड़ की राजधानी पहाड़ में ही हो’
गैरसैंण। उत्तराखंड राज्य निर्माण की अग्रणी संस्था ‘उत्तराखंड क्रांति दल’ ने एक बार फिर प्रदेश की स्थायी राजधानी के संवेदनशील मुद्दे पर हुंकार भरी है। गैरसैंण में आयोजित एक पूर्व घोषित कार्यक्रम के दौरान दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र कुकरेती ने दो-टूक शब्दों में कहा कि जब तक उत्तराखंड की राजधानी पहाड़ों में स्थापित नहीं होगी, तब तक पर्वतीय क्षेत्रों का वास्तविक और संतुलित विकास एक सपना ही बना रहेगा।
देश का इकलौता राज्य जिसकी राजधानी तय नहीं
पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कुकरेती ने इस स्थिति को राज्य के लिए ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया। उन्होंने कहा, “पूरे हिंदुस्तान में उत्तराखंड एकमात्र ऐसा राज्य है, जो बनने के इतने वर्षों बाद भी अपनी स्थायी राजधानी तय नहीं कर पाया है।” उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजधानी के अभाव में नीति-निर्धारण का केंद्र पहाड़ों से दूर है, जिसका खामियाजा सीमांत क्षेत्रों की जनता भुगत रही है।
पर्वतीय राज्यों की परंपरा का दिया हवाला
अपने संबोधन में कुकरेती ने तर्क दिया कि देश के अन्य सभी हिमालयी और पर्वतीय राज्यों की राजधानियाँ उनके पहाड़ी क्षेत्रों में ही स्थित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया:
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पहाड़ की राजधानी पहाड़ में होने से ही शासन-प्रशासन की पहुँच दुर्गम क्षेत्रों तक होगी।
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मैदानी क्षेत्रों से संचालित हो रही सरकारें पहाड़ों की भौगोलिक चुनौतियों को समझने में विफल रही हैं।
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UKD अपनी इस मांग को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।
संतुलित विकास की शर्त है ‘गैरसैंण’
यूकेडी अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि गैरसैंण में आयोजित कार्यक्रम दल की पुरानी और अडिग मांग का हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, वह तभी साकार होगी जब सत्ता का केंद्र पहाड़ के बीचों-बीच यानी गैरसैंण में होगा।
