मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक
देहरादून। उत्तराखंड में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने के कारण वनाग्नि की घटनाओं में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक ने चेतावनी दी है कि शुष्क मौसम के चलते जंगलों में आग लगने का खतरा काफी अधिक है, जो आगामी सीजन में वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
अलर्ट मोड पर वन विभाग: 18 फरवरी को हुई प्रदेशव्यापी मॉक ड्रिल
खतरे की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने पुलिस स्टेशन स्तर से लेकर वन मुख्यालय तक सभी इकाइयों को ‘अलर्ट मोड’ पर रखा है। संसाधनों की तत्परता और रिस्पॉन्स टाइम को जांचने के लिए 18 फरवरी को एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास में विभिन्न वन मंडलों और संबंधित विभागों ने हिस्सा लिया, ताकि आपात स्थिति में आपसी समन्वय को बेहतर बनाया जा सके।
शून्य क्षति का लक्ष्य: जनता से सहयोग की अपील
मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक ने स्पष्ट किया कि इन तैयारियों का मुख्य उद्देश्य वनाग्नि की घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण पाना और वन संपदा के नुकसान को न्यूनतम करना है।
“कम बारिश के कारण चुनौतियां बढ़ गई हैं, लेकिन हमारा तंत्र पूरी तरह तैयार है। हम आम जनता से भी अपील करते हैं कि वे जंगलों में आग से बचाव के नियमों का कड़ाई से पालन करें और किसी भी अप्रिय घटना की सूचना तत्काल विभाग को दें।” — सुशांत पटनायक, मुख्य वन संरक्षक
वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और स्थानीय समुदायों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं।
