निर्जला एकादशी
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की चाक-चौबंद; मेला क्षेत्र 12 जोन और 40 सेक्टरों में विभाजित
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का भारी हुजूम गंगा घाटों पर उमड़ पड़ा। हर की पैड़ी समेत विभिन्न घाटों पर श्रद्धालु मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इस पवित्र अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा फल, जल, घड़े और पंखे सहित विभिन्न वस्तुओं का दान कर पुण्य अर्जित किया जा रहा है।
सभी एकादशियों में श्रेष्ठ है निर्जला सनातन धर्म में निर्जला एकादशी को वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जल का भी त्याग कर भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक आराधना करने से सालभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में महर्षि वेदव्यास ने भीम को इस कठिन व्रत के महत्व के बारे में बताया था, जिसके बाद से इसे ‘भीमसेनी एकादशी’ भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि आज के दिन गंगा स्नान और व्रत रखने से आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ पितरों का तर्पण भी होता है।
सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए हरिद्वार पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। अपर जिला अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि:
“निर्जला एकादशी के पावन स्नान को सकुशल संपन्न कराने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 12 जोन और 40 सेक्टरों में बांटा गया है। सभी सेक्टरों और जोनों में मजिस्ट्रेट व पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।”
अपर जिला अधिकारी ने इसके साथ ही घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं से साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। घाटों पर जल पुलिस, गोताखोर और अतिरिक्त पुलिस बल मुस्तैद हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए रूट डायवर्जन प्लान लागू किया गया है और सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
