देहरादून प्रेस क्लब
- सात मोड़ पर पेड़ कटान के खिलाफ पर्यावरणविदों का फूटा गुस्सा, NHAI की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
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“हाथियों का गलियारा तबाह कर रहा विकास का मॉडल”: ऋषिकेश में सड़क चौड़ीकरण के विरोध में उठी मुखर आवाज
देहरादून: ऋषिकेश के सात मोड़ पर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हो रहे पेड़ कटान के विरोध में देहरादून प्रेस क्लब में पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता की। वक्ताओं ने सड़क चौड़ीकरण पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यह क्षेत्र हाथियों का प्रमुख गलियारा है, और पेड़ कटने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाएगा।
पर्यावरणविद् हिमांशु अरोड़ा ने कहा कि जंगलों को कंक्रीट के जाल में घेरने से वन्यजीव इंसानी बस्तियों का रुख करने को मजबूर होंगे, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष खतरनाक स्तर पर पहुंच जाएगा। अनूप नौटियाल ने आरटीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले 25 वर्षों में उत्तराखंड के कुल जंगल कटान का 47 प्रतिशत हिस्सा अकेले देहरादून जिले में हुआ है, जिससे यह कंक्रीट का जंगल बनता जा रहा है।
प्रेस वार्ता में सवाल उठाया गया कि जब नेपाली फार्म से देहरादून जाने वाला फोरलेन हाईवे पहले से मौजूद है, तो एनएचएआई दूसरा हाईवे क्यों बना रहा है? वक्ताओं ने समाधान सुझाते हुए कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सात मोड़ मार्ग पर रात 8 से सुबह 6 बजे तक यातायात बंद कर नेपाली फार्म रूट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। आगामी रणनीति के तहत 15 अगस्त को जागरूकता कार्यक्रम, रक्षाबंधन पर पेड़ों को रक्षासूत्र बांधना और 9 सितंबर को हिमालय दिवस पर वृहद प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान जया सिंह, इरा चौहान, रूचि सिंह, अनीश लाल और वासु खन्ना सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
