खेल मंत्री रेखा आर्या
सरकारी विभागों के काम के बोझ तले दबा खिलाड़ियों का अभ्यास, खेल मंत्री रेखा आर्या बोलीं- समाधान के लिए अगस्त-सितंबर में आएगी विशेष खेल भर्ती।
देहरादून: उत्तराखंड को “खेलभूमि” बनाने के सरकारी दावों के बीच राज्य के पदक विजेता खिलाड़ियों के सामने एक नई और अनोखी चुनौती खड़ी हो गई है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने के बाद ‘आउट ऑफ टर्न’ योजना के तहत सरकारी नौकरी पाने वाले एथलीटों को अब विभागीय जिम्मेदारियों और खेल अभ्यास के बीच संतुलन बनाने में भारी कठिनाई हो रही है। खिलाड़ियों का कहना है कि काम के अधिक दबाव के कारण उन्हें नियमित अभ्यास के लिए समय नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके खेल करियर पर फुल स्टॉप लगने की आशंका बढ़ गई है।
इंटरनेशनल मेडल विजेताओं ने उठाई आवाज
राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता एथलीट सूरज पंवार (युवा कल्याण विभाग) और अंकित रावत (वन विभाग) ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया है। एथलीटों का कहना है कि कभी विभागीय आदेश तो कभी प्रतियोगिता की तैयारी—दोनों के बीच समय का प्रबंधन करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई बार ट्रेनिंग कैंपों और प्रतियोगिताओं में जाने के लिए जरूरी छुट्टियों की अनुमति मिलने में भी लंबा वक्त लग जाता है। इस मामले पर खेल निदेशक दीप्ति सिंह ने भी चिंता जताते हुए कहा कि यदि कोई खिलाड़ी सरकारी नौकरी मिलने के बाद अपना खेल ही जारी न रख पाए, तो यह पूरे राज्य के लिए एक गंभीर विषय है।
खेल विभाग में ही मिलेगी नियुक्ति, जल्द आएगी नई विज्ञप्ति: खेल मंत्री
मामले की गंभीरता को देखते हुए खेल मंत्री रेखा आर्या ने माना कि वन विभाग, पुलिस और शिक्षा जैसे अन्य गैर-खेल विभागों में खिलाड़ियों को व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल नौकरी देना नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के खेल को सुरक्षित रखना भी है। खेल मंत्री ने घोषणा की है कि भविष्य में खिलाड़ियों को खेल एवं युवा कल्याण विभाग में ही नियुक्तियां दी जाएंगी, ताकि वे खेल के अनुकूल माहौल में रह सकें। इसके लिए सभी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और यदि सब कुछ तय समय पर रहा, तो अगस्त या सितंबर तक ‘आउट ऑफ टर्न’ नियुक्तियों के लिए नए विज्ञापन जारी कर दिए जाएंगे। वर्तमान में जहां 29 खिलाड़ी नौकरी पा चुके हैं, वहीं 243 खिलाड़ी अभी भी इस नई भर्ती के इंतजार में हैं।
