हल्द्वानी रामलीला मैदान
हल्द्वानी: कुमाऊं के प्रवेशद्वार हल्द्वानी का ऐतिहासिक और 150 साल से अधिक पुराना रामलीला मैदान इन दिनों पूरे देश में राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद एक संगठन द्वारा किए गए ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम और उसके बाद संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) तक गूंजे इस मामले ने इसे सोशल मीडिया पर एक हॉट टॉपिक बना दिया है। हालांकि, सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही इस आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति के उलट, धरातल पर इस धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जगह की स्थिति बेहद दयनीय और चिंताजनक है।
बदहाली के आंसू रो रहा मैदान
राजनीतिक गर्मागरम बहस के बीच जब मीडिया टीम ने रामलीला मैदान का जायजा लिया, तो वहां की तस्वीर ने व्यवस्था की पोल खोल दी। मुख्य कक्ष में जहां एक तरफ बीएलओ एसआईआर (BLO SIR) के कार्यों में जुटे दिखे और पार्किंग कर्मी वाहन खड़े करने की पर्ची काटते नजर आए, वहीं मैदान के अन्य हिस्सों की हालत बद से बदतर मिली।
-
नशे का गढ़: मैदान के कोने-कोने में नशेड़ियों द्वारा इस्तेमाल किए गए सीरिंज, दवाइयों की खाली शीशियां, शराब और बीयर की बोतलें तथा फेंके गए डिस्पोजेबल गिलास बिखरे पड़े थे।
-
चारों तरफ गंदगी: ऐतिहासिक मंचन की शुरुआत करने वाला यह मैदान आज चारों तरफ फैली गंदगी और उपेक्षा के ढेरों से घिरा हुआ है।
प्रशासन की देखरेख में है मैदान
पूर्व में रामलीला कमेटी को लेकर उठे विवादों के बाद से वर्तमान में इस मैदान की पूरी जिम्मेदारी और प्रशासनिक व्यवस्था जिला प्रशासन के पास रिसीवर के रूप में है। सिटी मजिस्ट्रेट व रामलीला मैदान के प्रशासक एपी वाजपेयी का कहना है कि मैदान की व्यवस्था प्रशासन देखता है और बड़े आयोजनों के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। परिसर में मंदिर होने के कारण श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए बेरोकटोक पहुंचते हैं, और सुरक्षा व्यवस्था के लिए पीआरडी जवानों को हटाकर अब सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों को तैनात किया गया है।
बावजूद इसके, प्रशासनिक देखरेख के दावे धरातल पर कागजी साबित हो रहे हैं और ऐतिहासिक स्थल आज संरक्षण की सख्त दरकार में है।
