Jaspal Rana
नई दिल्ली|निशानेबाजी की दुनिया में भारत का परचम लहराने वाले और ‘गोल्डन बॉय’ के नाम से मशहूर दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का आकस्मिक निधन हो गया है। महज 18 साल की उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाकर दुनिया को चौंकाने वाले राणा के जाने से खेल जगत और सार्वजनिक जीवन में शोक की लहर है। एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों के इस स्वर्णिम नायक ने न सिर्फ खेल के मैदान पर देश को गौरवान्वित किया, बल्कि राजनीति और कोचिंग के क्षेत्र में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी।
हाल ही में म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ (ISSF) वर्ल्ड कप के दौरान उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद दिल्ली के एक अस्पताल में उनकी स्टेंट सर्जरी भी हुई थी। वे तेजी से रिकवर हो रहे थे, लेकिन अचानक आए इस दुखद मोड़ ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है।
राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के ‘सुलतान’
जसपाल राणा भारत के सबसे सफल और बहुमुखी प्रतिभा के धनी निशानेबाजों में गिने जाते थे। उनके करियर की कुछ ऐसी उपलब्धियां हैं जो इतिहास के पन्नों में हमेशा दर्ज रहेंगी:
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1995 कॉमनवेल्थ गेम्स का चमत्कार: उन्होंने 1995 के राष्ट्रमंडल खेलों में एक साथ 8 स्वर्ण (Gold) पदक जीतकर तहलका मचा दिया था। यह उस समय किसी भी भारतीय निशानेबाज का सर्वश्रेष्ठ और ऐतिहासिक प्रदर्शन था।
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102 डिग्री बुखार में रचा इतिहास: वर्ष 2006 के दोहा एशियाई खेलों में जसपाल राणा को 102 डिग्री का तेज बुखार था। इसके बावजूद उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा और तीन स्वर्ण पदक जीतकर देश की झोली में डाले। उनकी यह जिद आज भी भारतीय खेल इतिहास की सबसे यादगार कहानियों में से एक है।
खेल के मैदान से सियासत के अखाड़े तक
जसपाल राणा सिर्फ खेल के दायरे तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सार्वजनिक जीवन और राजनीति में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई:
2009 का लोकसभा चुनाव: उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर उत्तराखंड की हाई-प्रोफाइल टिहरी गढ़वाल संसदीय सीट से चुनाव लड़ा। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली।
2012 का विधानसभा चुनाव: इसके बाद वर्ष 2012 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के दौरान वे पाला बदलकर कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में मंचों पर नजर आए।
नई पीढ़ी के मार्गदर्शक: हाई-परफॉर्मेंस कोच
सक्रिय खेल से संन्यास लेने के बाद भी जसपाल राणा का निशानेबाजी से नाता नहीं टूटा। हाल के वर्षों में वे भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में देश की सेवा कर रहे थे। उन्होंने अपनी देखरेख में देश को कई विश्वस्तरीय निशानेबाज दिए और ओलंपिक व वर्ल्ड कप के लिए नई पीढ़ी को तैयार करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।
खेल, राजनीति और कोचिंग में उनकी यह बहुआयामी सक्रियता उन्हें एक असाधारण व्यक्तित्व बनाती है। उनका इतनी जल्दी दुनिया से चले जाना देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
