हल्द्वानी मुख्य कृषि मंडी
दिल्ली सरकार द्वारा ‘ग्रीन सेस’ लगाने के विरोध में चक्का जाम; देश की सबसे बड़ी आजादपुर मंडी में माल न जाने से दाम गिरे, किसानों को भारी नुकसान
हल्द्वानी : हल्द्वानी मुख्य कृषि मंडी से दिल्ली के लिए फल और सब्जियां ले जाने वाले ट्रांसपोर्टरों ने अचानक अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते उत्तराखंड के पर्वतीय और तराई क्षेत्रों से आने वाली ताजी फल-सब्जियों की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। देश की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी, दिल्ली की आजादपुर मंडी तक उत्तराखंड का माल नहीं पहुंच पा रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि दिल्ली सरकार द्वारा फल और सब्जियों वाले वाहनों पर अचानक ‘ग्रीन सेस’ (हरित कर) लागू कर दिया गया है, जिसके विरोध में उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।
वर्तमान समय में उत्तराखंड के पर्वतीय और घाटी वाले क्षेत्रों से रसीले फल (जैसे काफल, लीची, आडू, प्लम) और बेमौसमी सब्जियां (जैसे पहाड़ी आलू, शिमला मिर्च, टमाटर, बीन्स) भारी मात्रा में रोजाना हल्द्वानी मंडी पहुंच रही हैं। लेकिन आगे की सप्लाई रुकने के कारण स्थानीय मंडी में इन उत्पादों का अंबार लग गया है। मांग और सप्लाई का संतुलन बिगड़ने की वजह से हल्द्वानी मंडी में फल-सब्जियों के दामों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका सीधा और तगड़ा नुकसान उन गरीब काश्तकारों और किसानों को उठाना पड़ रहा है, जिनकी महीनों की मेहनत औने-पौने दामों में बिकने को मजबूर है।
संकट में पहाड़ के रसीले फल और उत्पाद
मुख्य उत्पाद: काफल, आडू, प्लम, खुबानी, लीची और तराई की हरी सब्जियां।
असर: दिल्ली सप्लाई ठप होने से हल्द्वानी मंडी में माल डंप, खराब होने की आशंका।
नुकसान: लोकल मार्केट में रेट गिरने से लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं पर्वतीय क्षेत्रों के किसान।
क्यों ठप हुए पहिए?
अचानक लगा टैक्स: ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक, पहले फल-सब्जी ले जाने वाले कमर्शियल वाहनों से कोई ग्रीन सेस नहीं लिया जाता था।
₹1500 प्रति गाड़ी का बोझ: नए नियम के बाद अब दिल्ली सीमा में प्रवेश करते ही प्रत्येक गाड़ी पर करीब 1500 रुपये तक का अतिरिक्त टैक्स बढ़ गया है।
ट्रांसपोर्टरों की मांग: जब तक दिल्ली सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती या इसमें ढील नहीं देती, तब तक आजादपुर मंडी के लिए गाड़ियों का संचालन बंद रहेगा।
मंडी एसोसिएशन और व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। व्यापारियों का कहना है कि यदि यह हड़ताल अगले दो-तीन दिन और खिंची, तो करोड़ों रुपये का पहाड़ी माल सड़कर बर्बाद हो जाएगा। ट्रांसपोर्टरों ने साफ कर दिया है कि अचानक थोपे गए इस टैक्स के साथ वे गाड़ियों का संचालन नहीं कर सकते क्योंकि इससे उनकी लागत और भाड़ा काफी बढ़ गया है। इधर, परेशान किसानों ने उत्तराखंड सरकार और मंडी परिषद से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि दिल्ली सरकार से वार्ता कर इस संकट का कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके और किसानों को बर्बादी से बचाया जा सके।
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