डिप्लोमा इंजीनियर्स
देहरादून| अपनी 27 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रही। शासन की अनदेखी से नाराज इंजीनियरों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। आंदोलन को उस वक्त और मजबूती मिली जब सिंचाई, लोनिवि और ऊर्जा निगमों के बाद आज जल संस्थान के इंजीनियर भी काम ठप कर हड़ताल में शामिल हो गए।
ठप हुए विकास कार्य, जनता की बढ़ी मुश्किलें
प्रदेशव्यापी इस हड़ताल के कारण सरकारी विभागों में कामकाज पूरी तरह चरमरा गया है। नए विकास कार्यों की फाइलें रुक गई हैं और विभागीय सेवाएं बाधित हो रही हैं।
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प्रमुख मांगें: वेतन विसंगतियों का निस्तारण, समयबद्ध पदोन्नति , पुरानी पेंशन योजना की बहाली और सेवा शर्तों में सुधार।
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आरोप: महासंघ का कहना है कि सरकार और शासन स्तर पर केवल पत्राचार और कोरे आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि कई मांगों पर पूर्व में सहमति बन चुकी थी।
चरणबद्ध आंदोलन से अनिश्चितकालीन जंग तक
इंजीनियरों ने सीधे अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता नहीं चुना। इससे पहले महासंघ ने जनपद स्तर पर धरने और प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को चेताया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर अब ‘आर-पार’ की लड़ाई का ऐलान किया गया है।
“जब तक हमारी सभी 27 मांगों पर ठोस शासन आदेश (GO) जारी नहीं होता, तब तक यह हड़ताल समाप्त नहीं होगी। सरकार हमारी गंभीरता की परीक्षा न ले, यदि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।” — वीरेंद्र सिंह मेहता मंडल उपाध्यक्ष कुमाऊं जल संस्थान संघ
विकास की रफ्तार पर लगा ‘ब्रेक’
हड़ताल के चलते सड़कों के निर्माण, बिजली आपूर्ति से जुड़े रखरखाव और अब जल आपूर्ति से संबंधित तकनीकी कार्यों पर संकट गहराने लगा है। शासन स्तर पर अभी भी गतिरोध बरकरार है, जिससे आने वाले दिनों में आम जनता की परेशानियां और अधिक बढ़ सकती हैं।
