प्रभागीय वनाधिकारी हिंमाशु बांगरी
हल्द्वानी| तराई पूर्वी वन प्रभाग की डोली रेंज में रविवार रात पकड़ी गई सागौन की तस्करी का मामला अब विवादों और सवालों के घेरे में आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल बरामद लकड़ी की संख्या को लेकर उठ रहा है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठा दी हैं।
क्या है आंकड़ों का गणित?
स्थानीय स्तर पर और प्रत्यक्षदर्शियों के बीच चर्चा है कि पकड़े गए पिकअप वाहन में करीब 21 सागौन के लट्ठे लदे थे। इसके विपरीत, प्रभागीय वनाधिकारी हिंमाशु बांगरी द्वारा मीडिया को जारी आधिकारिक बयान में केवल 12 लट्ठों की बरामदगी की बात कही गई है। आंकड़ों में आया यह ‘9 लट्ठों का अंतर’ अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, विभाग इसे शुरुआती गिनती में हुई मानवीय चूक मानकर चल रहा है।
देर रात की कार्रवाई, अंधेरे में भागा तस्कर
डीएफओ हिमांशु बांगरी के अनुसार, मुखबिर की सूचना पर वन विभाग की टीम ने रविवार देर रात घेराबंदी की थी। चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध पिकअप वाहन को रोका गया, जिसमें अवैध सागौन लदा पाया गया।
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कार्रवाई: वाहन को मौके पर ही सीज कर दिया गया है।
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फरार आरोपी: चालक अंधेरे का लाभ उठाकर भागने में सफल रहा।
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तलाश: वाहन स्वामी की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
“मामले की विस्तृत जांच जारी है। लकड़ी के स्रोत और इसे कहाँ ले जाया जा रहा था, इसका पता लगाया जा रहा है। तस्करी को बढ़ावा न मिले, इसलिए लकड़ी की कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है।” — हिंमाशु बांगरी, डीएफओ (तराई पूर्वी वन प्रभाग)
यूपी से जुड़े तार: बड़े नेटवर्क की आशंका
सूत्रों की मानें तो इस तस्करी के तार उत्तर प्रदेश से जुड़े हो सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि तीलियापुर-डोली रेंज से अवैध कटान कर लकड़ी को बाहरी राज्यों में खपाने वाला कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। इतने बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी ने वन विभाग के सुरक्षा दावों की भी पोल खोल दी है।
फिलहाल, विभाग निष्पक्ष जांच की बात कह रहा है, लेकिन सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच में ‘गायब’ हुए लट्ठों का सच सामने आएगा या इसे महज एक ‘लिपिकीय त्रुटि’ मानकर रफा-दफा कर दिया जाएगा।
