गर्भवती को डंडी के सहारे अस्पताल ले जाते ग्रामीण
चमोली |उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सड़क सुविधा न होना आज भी आम जनजीवन के लिए एक विकराल समस्या बना हुआ है। चमोली जिले के एक गांव में सड़क न होने के कारण प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने डंडी (पालकी) के सहारे 6 किलोमीटर की कठिन और जोखिमभरी दूरी तय कर अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान ग्रामीणों को प्रशासन की लचर व्यवस्था का भी सामना करना पड़ा, क्योंकि साढ़े चार घंटे इंतजार करने के बाद भी हेलीकॉप्टर मौके पर नहीं पहुंच पाया।
प्रमुख बिंदु
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स्थान: पिनाऊं गांव, चमोली (उत्तराखंड)।
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घटना: गर्भवती आंगनबाड़ी कार्यकत्री (खिमुली देवी) को अचानक प्रसव पीड़ा।
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संघर्ष: 6 किमी पैदल और क्षतिग्रस्त मार्ग पर डंडी के सहारे सफर, 4.5 घंटे हेलीकॉप्टर का इंतजार।
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अस्पताल का हाल: देवाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर न मिलने पर एम्बुलेंस से जिला अस्पताल बागेश्वर ले जाना पड़ा।
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सड़क की स्थिति: वर्ष 2015 में स्वीकृत हुई थी धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं सड़क, लेकिन 11 साल बीत जाने के बाद भी गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है।
11 साल से कागजों में अटकी है सड़क योजना
ग्रामीणों ने बताया कि यह गांव स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेजर देव सिंह दानू और पूर्व विधायक स्व. शेर सिंह दानू का पैतृक गांव है। पूर्व मुख्यमंत्रियों हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा घोषणा किए जाने तथा पूर्व विधायक स्व. शेर सिंह दानू के नाम पर वर्ष 2015 में 23 किलोमीटर लंबी सड़क स्वीकृत होने के बावजूद आज तक गांव तक पहिया वाहन नहीं पहुंच पाया है।
अधिकारियों का पक्ष:
लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) थराली के अधिशासी अभियंता (ईई) मनीष डोगरा का कहना है कि स्वीकृत सड़क मार्ग में वन भूमि (बाज व बुराश के पेड़) आने के कारण हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। यदि ग्रामीणों की सहमति बनती है, तो वांक गांव से भी पिनाऊं के लिए वैकल्पिक मार्ग पर विचार किया जा सकता है।
