मदरसा बोर्ड
देहरादून: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की सरकार की मंशा को बड़ा झटका लगा है। मदरसा बोर्ड के समाप्त होने के बाद गठित राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के एक महीने से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद राज्य में मात्र एक फीसदी मदरसे ही मान्यता ले पाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई मदरसों ने मान्यता लेने से साफ इनकार कर दिया है।
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मात्र 7 मदरसों को मिली मान्यता: राज्य के 452 मदरसों में से अब तक केवल 7 मदरसों को ही शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता मिल पाई है।
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मानक पूरे न होना और इनकार: ऊधमसिंह नगर में 11 आवेदन मानक पूरे न होने पर रद्द कर दिए गए, जबकि देहरादून और नैनीताल में अभी तक बैठक तक आयोजित नहीं हो पाई है। कुछ मदरसों ने तो जांच टीम को सूचना देने या मान्यता लेने से ही मना कर दिया है।
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आधुनिक शिक्षा का उद्देश्य: सरकार का उद्देश्य मदरसों के बच्चों को विज्ञान और गणित जैसी आधुनिक शिक्षा देना और पारदर्शी प्रशासनिक दायरा बनाना है, जिसमें सभी अल्पसंख्यक समुदाय शामिल हैं।
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बचे हैं केवल कुछ दिन: मदरसों को मान्यता के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। इसके बाद तय मानकों पर खरा न उतरने वाले संस्थानों और बच्चों को शिफ्ट करने को लेकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी का बयान: “मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। 30 सितंबर को समय पूरा होने के बाद नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” — डाॅ. सुरजीत सिंह गांधी, अध्यक्ष, राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण
