सड़कों पर उतरे व्यापारी
देहरादून:नगर निगम की ओर से पॉलीथिन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। इसी के विरोध में विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने नगर निगम के खिलाफ सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। व्यापारियों का आरोप है कि पॉलीथिन के नाम पर छोटे कारोबारियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है और उन पर भारी-भरकम चालान थोपे जा रहे हैं।
व्यापारियों का पक्ष: जड़ पर हो कार्रवाई, न कि छोटे दुकानदारों का उत्पीड़न
व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि वे शहर को पॉलीथिन मुक्त बनाने के प्रयासों के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे भी इसके समर्थन में हैं। हालांकि, उनका कहना है कि कार्रवाई का तरीका पूरी तरह अनुचित है।
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सीमित बिक्री पर भारी चालान: छोटे दुकानदारों की दिनभर की कुल बिक्री जितनी होती है, उससे अधिक राशि के चालान काटे जा रहे हैं, जो उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर हैं।
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भय का माहौल: व्यापारियों ने शिकायत की कि कई बार 15-20 अधिकारियों का दल दुकानों में इस तरह धमकता है, मानो कोई गंभीर अपराध हुआ हो। इससे छोटे दुकानदारों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।
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उत्पादन और सप्लाई चेन पर लगे रोक: व्यापार मंडल का तर्क है कि यदि सरकार वास्तव में पॉलीथिन पर रोक लगाना चाहती है, तो कार्रवाई छोटे दुकानदारों तक सीमित न रहकर पॉलीथिन के उत्पादन, डिस्ट्रीब्यूशन और सप्लाई चेन के मुख्य स्रोतों पर की जानी चाहिए।
“हम पॉलीथिन के खिलाफ हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा छोटे-छोटे व्यापारियों का जिस तरह उत्पीड़न किया जा रहा है, वह गलत है। जीएसटी विभाग के माध्यम से एचएसएन (HSN) कोड की पहचान करके सप्लाई रोकने के बजाय सिर्फ लीपापोती की जा रही है और अखबारों में फोटो छपवाने के लिए चालान काटे जा रहे हैं।”
— विवेक अग्रवाल, अध्यक्ष
व्यापार मंडल की प्रमुख मांगें
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पॉलीथिन के खिलाफ कार्रवाई केवल खुदरा दुकानदारों पर न करके, उत्पादन और सप्लाई चेन के स्तर से शुरू की जाए।
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छोटे व्यापारियों के खिलाफ अनावश्यक उत्पीड़न और भारी-भरकम चालान की प्रक्रिया तुरंत बंद हो।
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प्रशासन और नगर निगम अपनी नीति और मंशा को स्पष्ट करें।
बड़ी चेतावनी: चाबियां सौंपने की दी चेतावनी
व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह उत्पीड़न जारी रहा, तो व्यापार मंडल, डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन, जनरल मर्चेंट एसोसिएशन और हनुमान चौक क्षेत्र की करीब 11 व्यापारिक संस्थाएं एकजुट होकर बड़ा धरना-प्रदर्शन करेंगी। जरूरत पड़ने पर व्यापारी अपनी दुकानों की चाबियां मेयर को सौंपकर बाजार चलाने की जिम्मेदारी खुद नगर निगम को देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
