मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री बोले- समय से पहले चुनाव की कोई आधिकारिक सूचना या तैयारी नहीं, तारीख तय करना सिर्फ चुनाव आयोग का काम।
देहरादून: उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से समय से पहले विधानसभा चुनाव कराए जाने को लेकर चल रही तमाम राजनीतिक अटकलों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने इन चर्चाओं को पूरी तरह निराधार बताया। सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास किसी भी स्तर से ऐसी कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है और न ही शासन स्तर पर समय से पहले चुनाव को लेकर कोई तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव कब कराने हैं, इसका पूरा अधिकार सिर्फ भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के पास है और आयोग के फैसले का सभी को पालन करना होगा।
क्यों लग रही थीं समय से पहले चुनाव की अटकलें?
दरअसल, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेजी से तैर रही थी कि राज्य में फरवरी 2027 के बजाय नवंबर या दिसंबर 2026 में ही विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। इन अटकलों के पीछे सबसे बड़ा कारण जनवरी 2027 में प्रस्तावित हरिद्वार कुंभ मेला है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं की आमद के चलते पूरा प्रशासनिक अमला व्यस्त रहेगा। इसके अलावा वर्ष 2027 में शुरू होने वाली राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया और वर्तमान में निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य ने भी इन चर्चाओं को हवा दी। हाल के दिनों में भाजपा और कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं के बैक-टू-बैक दौरों ने भी इस सियासी सुगबुगाहट को बढ़ा दिया था।
आधिकारिक घोषणा तक समय पर ही होंगे चुनाव
मुख्यमंत्री के इस बेहद स्पष्ट बयान के बाद अब यह साफ हो गया है कि उत्तराखंड में समय से पहले चुनाव की बातें महज एक राजनीतिक कयासबाजी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक चुनाव आयोग खुद कोई आधिकारिक कार्यक्रम या अधिसूचना जारी नहीं करता, तब तक उत्तराखंड विधानसभा चुनाव अपने तय समय यानी 2027 की शुरुआत में ही आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री के इस रुख से प्रशासनिक हल्कों और राजनीतिक दलों में फिलहाल असमंजस की स्थिति खत्म हो गई है।
