हरक सिंह रावत
देहरादून।राजधानी देहरादून के एक अस्पताल में हाल ही में हुए एसी (AC) ब्लास्ट हादसे ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस भीषण दुर्घटना में एक महिला की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद अब शहर की भवन निर्माण और फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को आड़े हाथों लेते हुए एक बड़ा बयान दिया है।
एमडीडीए और फायर सर्विस पर गंभीर आरोप
हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि शहर में फायर सेफ्टी नियमों की सरेआम अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा, “देहरादून में कई इमारतें नियमों को ताक पर रखकर बनाई जा रही हैं और पैसे लेकर परमिशन देने का खेल चल रहा है।”
उन्होंने रिस्पना पुल के पास बन रही एक बहुमंजिला इमारत का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि नियम के अनुसार नदी और नालों से तय दूरी बनाकर ही निर्माण होना चाहिए, लेकिन नियमों के विपरीत पुल के बिल्कुल पास निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। ऐसे संकरे और नियम-विरुद्ध स्थानों पर अगर कभी आग लगती है, तो फायर सर्विस की गाड़ियां मौके तक पहुंच ही नहीं पाएंगी।
“सिर्फ कागजों पर मिल रही एनओसी (NOC)”
पूर्व मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करते हुए कहा कि एक अस्पताल चलाने के लिए:
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फायर ब्रिगेड (Fire Safety)
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)
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पर्यावरण विभाग (Pollution Control Board)
जैसे तमाम महत्वपूर्ण विभागों की अनुमति (NOC) जरूरी होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फायर सर्विस अक्सर समय पर मौके पर नहीं पहुंचती, जिसके कारण लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
“अस्पताल में हुआ हादसा बेहद दुखद और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। अगर जांच में लापरवाही साबित होती है, तो अस्पताल मैनेजमेंट और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि सीधे हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।”
— हरक सिंह रावत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
