ईद
देहरादून।ईद-अल-अज़हा (बकरीद) के पावन अवसर पर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने देश और प्रदेश वासियों से त्यौहार को पूरी सादगी, मोहब्बत और आपसी सौहार्द के साथ मनाने की अपील की है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि कल सऊदी अरब में और उसके अगले दिन भारत में ईद का त्यौहार पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
कुर्बानी का असली मतलब: दूसरों की मदद
शादाब शम्स ने कुर्बानी के वास्तविक अर्थ को समझाते हुए कहा, “यह त्यौहार हमें अपनी सबसे प्यारी चीज़ों को मुल्क, दोस्तों और अज़ीज़ों पर कुर्बान करने का जज्बा सिखाता है।” उन्होंने एक व्यावहारिक उदाहरण देते हुए कहा कि अगर रास्ते में कोई एक्सीडेंट में घायल हो जाए, तो अपनी नई गाड़ी की सीट खराब होने की चिंता किए बिना उसकी जान बचाना ही सच्ची कुर्बानी है। अगर आपका पैसा किसी बच्चे की जान बचा सकता है, तो इससे बेहतर और कोई बात नहीं हो सकती।
आस्था का सम्मान और शांति की अपील
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कानून व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सख्त लहजे में अपील की:
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माहौल खराब न करें: त्यौहार के दौरान किसी भी तरह की अफवाहों या हुड़दंग से दूर रहें।
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प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न दें: भूलकर भी किसी ऐसे जानवर की कुर्बानी न करें जो कानूनन प्रतिबंधित हो।
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एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करें: सभी समुदाय मिलकर एक-दूसरे की भावनाओं और आस्था का आदर करते हुए इस पर्व को मनाएं।
“ईद सब्र (धैर्य) का त्यौहार है। अपने जज्बात पर कंट्रोल रखकर ईश्वर को याद करें। इस मौके पर मुल्क की खुशहाली, मोहब्बत, आपसी सौहार्द और देश की हिफाजत करने वाले वीर जवानों की सलामती के लिए विशेष दुआ करें।”
— शादाब शम्स, अध्यक्ष (उत्तराखंड वक्फ बोर्ड)
