'डिजिटल अरेस्ट'
एएसपी साइबर क्राइम कुश मिश्रा की जनता से अपील— अनजान लिंक और इन्वेस्टमेंट ग्रुप्स से रहें दूर; 1930 पर तुरंत करें कॉल।
देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ते साइबर अपराधों, विशेषकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ और निवेश धोखाधड़ी को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जनता के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। साइबर क्राइम विभाग ने स्पष्ट किया है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है और यह केवल ठगों द्वारा डराने का एक तरीका है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
एएसपी साइबर क्राइम कुश मिश्रा ने आम जनता को आगाह करते हुए कहा कि व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा आज के समय में सबसे जरूरी है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अब VPN सर्वर और Tor सर्च इंजन जैसे जटिल तकनीकी रास्तों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उन तक पहुँचना काफी कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में, नागरिक की सावधानी ही ठगी से बचने का सबसे प्रभावी हथियार है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान:
-
अनजान लिंक्स: किसी भी संदिग्ध या अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
-
इन्वेस्टमेंट फ्रॉड: व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए “ज्यादा मुनाफे” का लालच देने वाले निवेश विज्ञापनों से बचें।
-
डेटा ब्रीच चेक: एएसपी ने सलाह दी कि लोग गूगल पर ‘Have I Been Pwned’ सर्च करें। इसके जरिए आप यह जान सकते हैं कि आपकी ईमेल आईडी या डेटा किसी साइबर हमले ( का शिकार तो नहीं हुआ है।
तुरंत यहाँ करें शिकायत
साइबर ठगी का शिकार होने पर या कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखने पर समय गंवाए बिना पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 100 या नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, ठगे गए पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक रहती है।
