मायरा केयर फाउंडेशन
विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस की पूर्व संध्या पर ‘मायरा केयर फाउंडेशन’ का बड़ा ऐलान; एक छत के नीचे मिलेंगी सभी विश्वस्तरीय सुविधाएं
देहरादून | विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के उपलक्ष्य में राजधानी देहरादून स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब आज नीले रंग की आभा और सकारात्मकता से सराबोर नजर आया। ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकारसे जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों को संबल देने के लिए ‘मायरा केयर फाउंडेशन’ ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राज्य के पहले अत्याधुनिक ‘होलिस्टिक लर्निंग सेंटर’ की स्थापना की घोषणा की है।
जागरूकता ही है एकमात्र समाधान
फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. निशांत नवानी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में ऑटिज़्म के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन सामाजिक भ्रांतियों के कारण प्रभावित बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “ऑटिज़्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। सही समय पर पहचान (Early Intervention) और विशेषज्ञों का सहयोग इन बच्चों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।”
‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ बनेगा नया सेंटर
फाउंडेशन की ऑपरेशन्स हेड अनीता शर्मा ने सेंटर की कार्ययोजना साझा करते हुए बताया कि यह सेंटर ‘एक छत के नीचे सब कुछ’ के मॉडल पर काम करेगा।
सेंटर की प्रमुख विशेषताएं: इंटीग्रेटेड थेरेपी: स्पीच, ऑक्यूपेशनल और बिहेवियरल थेरेपी की आधुनिक व्यवस्था।
-
व्यक्तिगत शिक्षा: हर बच्चे के लिए इंडिविजुअल लर्निंग प्लान और आर्ट थेरेपी।
-
आत्मनिर्भरता: योग, व्यावसायिक प्रशिक्षण और मानसिक परामर्श के जरिए बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना।
-
विस्तार: 2026 के अंत तक 50 बच्चों की क्षमता और भविष्य में पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ‘मोबाइल यूनिट्स’ का संचालन।
पहाड़ की चुनौतियों पर मंथन
सह-संस्थापक डॉ. जया नवानी ने उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में संसाधनों की कमी के कारण बच्चे उपचार से वंचित रह जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते हस्तक्षेप करने से 80% मामलों में सुधार संभव है। फाउंडेशन ने कॉर्पोरेट जगत और सरकार से इस मिशन में सहभागी बनने की अपील की है।
