शंकराचार्य
हरिद्वार: मकर संक्रांति के पावन पर्व पर संगम नगरी प्रयागराज में प्रशासन और साधु-संतों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। स्नान के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी को लेकर अब परशुराम अखाड़े ने कड़ा रुख अपनाया है। परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने उत्तर प्रदेश प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हु इसे संतों का अपमान बताया है।
“शिखा का अपमान बर्दाश्त नहीं”
पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रशासन का रवैया संतों के प्रति बेहद निंदनीय रहा है। उन्होंने विशेष रूप से शिष्यों की शिखा के साथ हुई बदसलूकी पर गहरी नाराजगी जताई। कौशिक ने कहा, “संतों की शिखा उनके ज्ञान का भंडार और उनकी अस्मिता का प्रतीक है। प्रशासन द्वारा इस तरह का दुर्व्यवहार न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है, बल्कि यह सनातन परंपरा का अपमान है।”
सरकार को चुनावी चेतावनी
अधीर कौशिक ने उत्तर प्रदेश सरकार को आगाह करते हुए कहा कि यदि इस घटना पर प्रशासन की ओर से त्वरित माफी या स्पष्टीकरण नहीं आता है, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “अगर संतों का क्रोध भड़का, तो आने वाले चुनाव में उत्तर प्रदेश सरकार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।”
स्नान की महत्ता को किया नजरअंदाज
अखाड़े का कहना है कि मकर संक्रांति का स्नान केवल सामान्य श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि साधु-संतों की तपस्या का मुख्य केंद्र होता है। ऐसे पवित्र अवसर पर प्रशासन को सहयोग करना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत वहां बदसलूकी की गई। संतों का मानना है कि प्रशासन की इस हरकत से पूरे देश के संत समाज में रोष व्याप्त है।
