बदहाल गंगा घाट
कांवड़ यात्रा के बाद बदहाल हुए हरिद्वार के गंगा घाट, चारों ओर कचरे के ढेर लाखों की भीड़ छंटते ही सफाई व्यवस्था हुई ध्वस्त, उठ रही सड़ांध से श्रद्धालु और स्थानीय लोग बेहाल
हरिद्वार |धर्मनगरी हरिद्वार में शरदीय कांवड़ यात्रा भले ही भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हो गई हो, लेकिन यात्रा के समापन के बाद गंगा घाटों की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद विचलित करने वाली हैं। लाखों श्रद्धालुओं की विदाई के बाद अब पवित्र गंगा के तटों पर आस्था की जगह कूड़े का साम्राज्य नजर आ रहा है। प्लास्टिक, फटे कपड़े, बचा हुआ भोजन और अन्य कचरे के अंबार ने घाटों की पवित्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धराशायी हुए प्रशासनिक दावे
यात्रा शुरू होने से पहले जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और नगर निगम प्रशासन ने चाक-चौबंद सफाई व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए थे। दुकानदारों और जनता से सहयोग की अपील भी की गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। घाटों के आसपास पसरी गंदगी से अब तेज बदबू उठने लगी है, जिससे वहां से गुजरना भी दूभर हो गया है।
नगर निगम की सुस्ती पर उठे सवाल
कांवड़ मेला समाप्त हुए समय बीत रहा है, लेकिन नगर निगम की टीमें अब तक कूड़ा उठाने में नाकाम रही हैं। कई प्रमुख घाटों पर हालात बदतर बने हुए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के साथ-साथ उन दुकानदारों ने भी जिम्मेदारी नहीं निभाई, जिन्होंने यात्रा के दौरान अच्छा मुनाफा तो कमाया लेकिन कूड़ा सड़कों और घाटों पर ही छोड़ दिया।
श्रद्धालुओं में भारी रोष
बाहर से आए श्रद्धालुओं ने भी व्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि जिस गंगा को हम मां मानते हैं, उसके तटों पर ऐसा नजारा देखना दुखद है। अब सवाल यह है कि आखिर स्वच्छता के नाम पर होने वाली भारी-भरकम कागजी कार्रवाई और बजट का लाभ जमीन पर कब दिखेगा?
