आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप
देहरादून| उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप के निर्देशानुसार, 15 फरवरी से पूरे क्षेत्र में एक व्यापक ‘सत्यापन अभियान’ छेड़ दिया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में रह रहे बाहरी व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित करना और संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाना है।
जांच के दायरे में कौन-कौन?
आईजी गढ़वाल ने बताया कि इस अभियान का पूरा ब्लूप्रिंट सभी जनपद प्रभारियों को सौंप दिया गया है। इस बार पुलिस का शिकंजा केवल किरायेदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक विस्तृत सूची शामिल की गई है:
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आवास एवं संस्थान: आश्रम, धर्मशाला, होमस्टे और हॉस्टल।
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व्यवसाय: जिम, स्पा और शिक्षण संस्थान।
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स्ट्रीट वेंडर्स: रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दुकानदार।
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डिलीवरी सेवा: जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों के फूड डिलीवरी बॉयज।
फूड डिलीवरी कर्मचारियों पर विशेष नजर
इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी फूड डिलीवरी पार्टनर्स का सत्यापन है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कर्मचारी रोजाना सैकड़ों घरों तक सीधी पहुंच रखते हैं। अब तक इनका कोई सुव्यवस्थित पुलिस सत्यापन तंत्र नहीं था, जिसे सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी खामी माना जा रहा था। अब पुलिस इन सभी का डेटाबेस तैयार करेगी।
“उत्तराखंड एक पर्यटन और तीर्थाटन राज्य है, जहाँ साल भर बाहरी लोगों की आवाजाही रहती है। देवभूमि की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए यह अभियान अत्यंत आवश्यक है। कोई भी संदिग्ध अब नजरों से ओझल नहीं रह पाएगा।” — पुलिस प्रशासन, गढ़वाल
मकान मालिकों को सख्त चेतावनी
अभियान के तहत किरायेदारों का सत्यापन भी प्राथमिकता पर है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो मकान मालिक अपने किरायेदारों का सत्यापन नहीं कराएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
