अभिनव थापर
देहरादून। उत्तराखंड में होमगार्ड वर्दी खरीद प्रकरण को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर ने भाजपा सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि कानून और संविधान के खुले उल्लंघन का है। उन्होंने आरोप लगाया कि डिप्टी कमांडेंट का निलंबन इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सरकार ने घोटाले को स्वीकार कर लिया है, लेकिन अब एक अधिकारी को ‘बलि का बकरा’ बनाकर असली चेहरों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
बाज़ार दरों से तीन गुना ज्यादा पर हुई सरकारी खरीद अभिनव थापर ने प्रेस वार्ता में वर्दी और अन्य उपकरणों की दरों के आंकड़े पेश करते हुए इसे ‘आपराधिक साक्ष्य’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई की लूट किस कदर हुई है, इसे इन रेट्स से समझा जा सकता है:
-
डंडा: 130 रुपये का सामान 375 रुपये में खरीदा गया।
-
जूते: 500 रुपये की कीमत वाले जूते 1500 रुपये में लिए गए।
-
पैंट-शर्ट: 1200 रुपये की ड्रेस के लिए 3000 रुपये चुकाए गए।
-
जैकेट: 500 रुपये की जैकेट 1580 रुपये में खरीदी गई।
नियमों की अनदेखी और ‘स्टेट स्पॉन्सर्ड लूट’ का आरोप थापर ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली 2017, वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन का है। उन्होंने सवाल उठाया कि खरीद प्रक्रिया में शामिल टेंडर समिति, लेखा अधिकारी और वित्तीय स्वीकृति देने वाले उच्चाधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने आरोप लगाया कि सप्लायर का नाम और रेट अप्रूवल करने वाले अधिकारियों के नाम छिपाकर सरकार ‘संगठित संरक्षण नीति’ पर काम कर रही है।
कांग्रेस की मांग: सिर्फ निलंबन नहीं, जेल हो कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में केवल विभागीय जांच पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि:
-
दोषियों के खिलाफ तत्काल IPC की धारा 409 और 420 के तहत FIR दर्ज हो।
-
पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक जांच कराई जाए।
-
घोटाले में शामिल सभी अधिकारियों और सप्लायरों की संपत्ति की जांच हो।
थापर ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो यह साफ हो जाएगा कि यह राज्य में ‘प्रशासनिक लूट’ का एक बड़ा मॉडल बन चुका है जिसे ऊपर से संरक्षण प्राप्त है।
