कांग्रेस
अंकिता भंडारी केस, महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा; वाटर कैनन की बौछारों के बीच डटे रहे दिग्गज कांग्रेसी
गैरसैंण। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सोमवार को भराड़ीसैंण की सड़कें राजनीतिक संग्राम का अखाड़ा बन गईं। प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड, वीआईपी के नाम का खुलासा, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर विधानसभा कूच किया। पुलिस द्वारा लगाए गए भारी बैरिकेडिंग और वाटर कैनन की बौछारों के बावजूद कांग्रेसी कार्यकर्ता टस से मस नहीं हुए।
दिग्गज नेताओं की अगुवाई में भारी शक्ति प्रदर्शन
प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने किया। विधानसभा भवन की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए थे। जब कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें छोड़ीं, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
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सरकार पर ‘आवाज दबाने’ का गंभीर आरोप
सड़क पर धरने पर बैठे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और गणेश गोदियाल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। कांग्रेस के मुख्य आरोप निम्नलिखित रहे:
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अंकिता भंडारी हत्याकांड: कांग्रेस ने मांग की है कि उस ‘वीआईपी’ का नाम सार्वजनिक किया जाए जिसका जिक्र केस में बार-बार आ रहा है।
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भ्रष्टाचार और बेरोजगारी: प्रदेश में चरम पर पहुंच चुकी बेरोजगारी और भर्ती घोटालों पर सरकार की चुप्पी को लेकर नारेबाजी की गई।
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लोकतंत्र का हनन: कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुलिस बल का प्रयोग कर सरकार विपक्ष की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है।
पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच घंटों चली ‘नोकझोंक’
बैरिकेडिंग के पास घंटों तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक जारी रही। भारी पुलिस बल तैनात होने के बावजूद कार्यकर्ता सरकार विरोधी नारों के साथ डटे रहे। कांग्रेस का कहना है कि जब तक जनता से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार ठोस जवाब नहीं देती, उनका आंदोलन सदन से सड़क तक जारी रहेगा।
