धामी सरकार का बड़ा फैसला
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा के ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में अब ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन कर दिया गया है। इस नए बदलाव के तहत 1 जुलाई 2026 से मौजूदा मदरसा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
एक छत के नीचे आएंगे सभी संस्थान
अब राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान एक ही प्राधिकरण के दायरे में आएंगे। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और सभी अल्पसंख्यक छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है।
IAS और PCS बनने का सपना होगा साकार
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देवभूमि ने यह अहम कदम उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का उद्देश्य अल्पसंख्यक बच्चों को केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आधुनिक और उच्चतम शिक्षा का अधिकार देना है, ताकि वे भविष्य में IAS और PCS जैसे प्रतिष्ठित पदों तक पहुँच सकें।
“हमारा लक्ष्य है कि अल्पसंख्यक बच्चों को राष्ट्रस्तरीय शिक्षा मिले। अब औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और प्राधिकरण धरातल पर काम करना शुरू कर देगा।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
अवैध मदरसों और फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनके अनुसार, इस प्राधिकरण के गठन से राज्य में चल रहे अवैध मदरसों और फर्जी प्रमाण पत्रों की समस्या से मुक्ति मिलेगी। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शिक्षा के स्तर को सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा।
देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड
उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने अल्पसंख्यकों की शिक्षा गुणवत्ता के लिए समर्पित प्राधिकरण का गठन किया है। अब देखना यह होगा कि इस बड़े बदलाव का जमीनी स्तर पर छात्रों के भविष्य पर क्या सकारात्मक असर पड़ता है।
