चारधाम यात्रा
देहरादून| उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा का आगाज 19 अप्रैल से गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ होने जा रहा है। इस वर्ष यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और अब तक 10 लाख से अधिक लोग ऑनलाइन पंजीकरण करा चुके हैं। हालांकि, ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम और सीएनजी की आपूर्ति का संकट इस यात्रा पर काले बादल की तरह मंडरा रहा है।
ईंधन संकट से निपटने को शासन मुस्तैद
वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन को अलर्ट पर रखा है। मुख्य सचिव आनंद वर्धन हर दूसरे दिन अधिकारियों के साथ बैठक कर गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में राज्य में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं।
रसोई गैस की जगह ‘लकड़ी’ बनेगा सहारा
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि यात्रा के दौरान उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में हर महीने करीब 15 से 16 हजार गैस सिलेंडरों की खपत होती है। यदि युद्ध के कारण एलपीजी की किल्लत होती है, तो इसके लिए पर्यटन विभाग ने वन विभाग से समन्वय किया है। यात्रा मार्ग पर स्थित होटल और रेस्टोरेंट को लकड़ी के टालों के माध्यम से जलाऊ लकड़ी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि व्यापारियों का काम न रुके।
व्यवस्थाओं के लिए करोड़ों का बजट जारी
यात्रा को सुगम बनाने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है:
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रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी: यात्रा व्यवस्थाओं के लिए प्रत्येक जिले को 3-3 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
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देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, टिहरी और पौड़ी: ऑफलाइन पंजीकरण और अन्य प्रबंधन के लिए प्रत्येक जिले को 1-1 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
व्यापारियों की उम्मीद और चुनौतियां
चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ है। छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े होटल कारोबारियों की 6 महीने की आजीविका इसी यात्रा पर टिकी होती है। बीते वर्षों में कोरोना महामारी और प्राकृतिक आपदाओं ने व्यापार को काफी नुकसान पहुँचाया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन वैश्विक चुनौतियों के बीच यात्रा को कितनी कुशलता से संचालित कर पाती है।
