नंदा देवी बड़ी
डोलियां वापस लौटीं, कल 23 सितंबर को कुरूड़ में होगा यात्रा का विधिवत समापन
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मुख्य अनुष्ठान: होमकुंड में बड़ी पूजा और चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई संपन्न।
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कुल दूरी: करीब 280 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा।
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अंतिम पड़ाव: 23 सितंबर को सिद्धपीठ कुरूड़ में यज्ञ के साथ समापन।
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विशेष आकर्षण: भक्तों पर देवी-देवताओं का अवतरण और भावुक कैलाश विदाई।
चमोली| हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी में पंचगंगा स्थित पवित्र होमकुंड में विश्व प्रसिद्ध श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा की विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो गए हैं। होमकुंड में पूजा के बाद तीन चौसिंगा खाड़ुओं को कैलाश के लिए विदाई दी गई, जिसके साथ ही यात्रा का मुख्य धार्मिक पड़ाव पूरा हो गया है। अब नंदा देवी की पावन डोलियां और छंतोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ की वापसी यात्रा पर हैं। आगामी 23 सितंबर को कुरूड़ पहुंचने पर भव्य यज्ञ-अनुष्ठान के साथ इस ऐतिहासिक बड़ी जात यात्रा का विधिवत समापन किया जाएगा।
होमकुंड में गूंजे नंदा देवी के जयकारें
16वें और तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र में स्नान व पूजा के बाद दशोली, बंड और ज्वाल्पा की नंदा देवी की डोलियां-छंतोलियां तथा पिछले 17 दिनों से यात्रा के साथ चल रहे तीन चौसिंगा खाड़ू होमकुंड पहुंचे। त्रिशूली और नंदा घुंघटी की पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित होमकुंड पहुंचते ही पूरा क्षेत्र मां नंदा के जयकारों से गूंज उठा। पंडित मुंशी राम गौड़, दिनेश गौड़, प्रकाश गौड़, उमेश गौड़, नवीन गौड़ और प्रवीण गौड़ सहित अन्य पुजारियों की देखरेख में धार्मिक विधि-विधान संपन्न कराए गए।
इस दौरान बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत, कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला सहित कई पदाधिकारी और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। पूजा-अनुष्ठान के दौरान कई नंदा भक्तों पर देवी-देवताओं का अवतरण हुआ, जिन्हें श्रद्धालुओं ने मां का आशीर्वाद मानकर दर्शन किए।
भावुक क्षण: चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई
यात्रा के दौरान सबसे भावुक पल तब आया जब तीन चौसिंगा खाड़ुओं को कैलाश की ओर विदा किया गया। खाड़ुओं की पीठ पर नंदा देवी को अर्पित किए जाने वाले खाजा, कलैऊ, प्रसादी, फल-फूल, आभूषण और श्रृंगार सामग्री सजाई गई। मंत्रोच्चार और मां नंदा के जयकारों के बीच जब खाड़ुओं को विदा किया गया, तो कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
वापसी का सफर और आगामी कार्यक्रम
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जामुन डाली और सुतोल पड़ाव: होमकुंड से लौटते हुए यात्रा जामुन डाली और सुतोल गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने देव डोलियों का भव्य स्वागत किया।
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280 किमी की कठिन यात्रा: करीब 280 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी करने के बाद भी श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
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देवराड़ा-थराली वापसी: उधर, देवराड़ा-थराली की उत्सव डोली ल्वाणी, उलंग्रा, हाट कल्याणी, इच्छोली और अठ्ठू गांव होते हुए बेराधार और सिरमथल से अपने निर्धारित पड़ावों की ओर बढ़ रही है।
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यात्रा का समापन: आगामी 23 सितंबर को दशोली और बंड की देव डोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंचेंगी, जहां यज्ञ-अनुष्ठान के साथ श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा-2026 का औपचारिक समापन होगा।
