स्वामी रामदेव
मुख्य बातें
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कंगना रनौत पर पलटवार: स्वामी रामदेव ने बिना नाम लिए कहा— “मैं ओछे लोगों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।”
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वान नेशन-वन इलेक्शन: शिक्षा और विकास के क्षेत्र में बड़े बदलाव आने की बात कही।
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वंदे मातरम पर बयान: इसे किसी विशेष धर्म या मठ से जोड़ने वालों को बताया बौद्धिक दिवालियापन।
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सामाजिक समरसता: समाज में भेदभाव और संन्यासियों के अपमान पर जताई चिंता।
हरिद्वार: हरिद्वार में आयोजित संत समागम के दौरान ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विषय पर संवाद कार्यक्रम में पहुंचे योग गुरु स्वामी रामदेव ने भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत के बयानों पर तीखा पलटवार किया है। हाल ही में सरकारी नौकरी के इंटरव्यू की गड़बड़ियों पर रामदेव की चेतावनी के बाद दोनों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई थी।
ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता: रामदेव
मीडिया द्वारा कंगना रनौत के बयानों को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वामी रामदेव ने बिना किसी का नाम लिए दोटूक अंदाज में कहा, “देखो जिन लोगों के बारे में… अभी क्या बोलूं, मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता। स्वामी रामदेव क्या है, ये देश जानता है। स्वामी रामदेव का योगदान क्या है, ये देश जानता है। इसलिए मैं ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।”
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से होगा विकास
कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (One Nation, One Election) प्रणाली लागू करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने से देश की शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी विकास के क्षेत्रों में अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव आएंगे।
वंदे मातरम पर क्या बोले स्वामी रामदेव?
वंदे मातरम के अर्थ और महत्व को स्पष्ट करते हुए रामदेव ने एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
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वंदे मातरम केवल भारत माता की वंदना है, यह किसी विशिष्ट देवी-देवता, मंदिर या मठ की पूजा नहीं है।
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भारत माता ही दुर्गा, लक्ष्मी, धर्म, विद्या और सबका सर्वस्व हैं।
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जो लोग वंदे मातरम को मठ-मंदिरों या संप्रदायों से जोड़ते हैं, वह उनका बौद्धिक दिवालियापन है। ऐसे लोग संस्कृत और भारतीय संस्कृति की मूल भावना से अनजान हैं।
सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर जोर
समाज में फैल रहे भेदभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि छात्रों, मरीजों, जवानों, किसानों, अनुसूचित जाति-जनजाति या ब्राह्मणों—किसी के भी साथ होने वाला अन्याय संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने ब्राह्मणों और संन्यासियों के अपमान पर भी कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि किसी भी वर्ग का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
