देहरादून |उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के सैनिक प्रकोष्ठ ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य परंपरा और युवाओं के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। देहरादून में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान दल ने केंद्र सरकार की ‘अग्निवीर योजना’ को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की और राज्य के युवाओं के हित में ठोस नीतियां बनाने की जोरदार मांग उठाई।
सैनिक बाहुल्य प्रदेश पर प्रभाव और भविष्य की चिंता
उत्तराखंड क्रांति दल ने कहा कि उत्तराखंड एक प्रमुख सैनिक बाहुल्य प्रदेश है, जहां की कई पीढ़ियों ने भारतीय सेना में अपनी सेवाएं देकर देश की सुरक्षा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। दल का कहना है कि अग्निवीर योजना का प्रदेश की सैन्य संस्कृति, युवाओं के रोजगार और उनके उज्ज्वल भविष्य पर जो प्रभाव पड़ रहा है, उस पर गंभीर मंथन और नीतिगत सुधार की आवश्यकता है।
दल के अनुसार, चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई स्पष्ट और पुख्ता व्यवस्था नजर नहीं आ रही है, जिसे लेकर युवाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
आरक्षण और पुनरोजगार के मुद्दों पर सरकार को घेरा
प्रेस वार्ता के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल ने पूर्व सैनिकों के लिए सरकारी सेवाओं में पुनरोजगार की 5 प्रतिशत व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। दल ने सवाल किया कि जब पूर्व सैनिकों के लिए यह कोटा अभी तक पूरी तरह धरातल पर लागू नहीं हो पाया है, तो ऐसे में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा केवल एक छलावा साबित हो रही है।
दल ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
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ठोस रोजगार नीतियां: अग्निवीरों के लिए चार साल की सेवा के बाद रोजगार और स्वरोजगार के पुख्ता विकल्प तैयार किए जाएं।
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प्राथमिकता: पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों और अन्य सरकारी सेवाओं में अग्निवीरों को विशेष प्राथमिकता दी जाए।
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तकनीकी प्रशिक्षण: युवाओं को सेवाकाल के दौरान ऐसा तकनीकी प्रशिक्षण मिले जो भविष्य में उनके लिए आजीविका का साधन बन सके।
‘युवाओं के हितों से नहीं होगा समझौता’
उत्तराखंड क्रांति दल ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश के युवाओं को केवल कोरे आश्वासनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। दल ने संकल्प दोहराया है कि युवा का सुरक्षित भविष्य, सैनिक का सर्वोच्च सम्मान और उत्तराखंड के हित सर्वोपरि हैं। इन मुद्दों को लेकर दल आगे भी अपनी आवाज मुखर रखता रहेगा।
