चमोली टनल हादसा
देहरादून: उत्तराखंड का चमोली जिला एक बार फिर गंभीर आपदा की चपेट में है। जिले के पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में थॉमस हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) की निर्माणाधीन टनल अचानक धंस गई, जिससे सुरंग के भीतर भारी मात्रा में पानी और मलबा भर गया। इस हादसे में कई मजदूरों के फंसने की सूचना है। मौके पर जिला प्रशासन, सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम लगभग 7:05 बजे एचसीसी कंपनी द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य के दौरान टनल में अचानक मलबा और पानी का रिसाव शुरू हो गया। शुरुआती दौर में टनल के अंदर 18 से 22 मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई थी। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद अब तक कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।
शीर्ष नेतृत्व की पैनी नजर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे हादसे का कड़ा संज्ञान लेते हुए व्यक्तिगत रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। सीएम ने अधिकारियों को मैदान पर उतरकर राहत कार्यों में तेजी लाने और फंसे हुए सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के कड़े निर्देश दिए हैं।
चमोली: आपदाओं का नया केंद्र
यह पहली बार नहीं है जब चमोली इस तरह की प्राकृतिक और मानवीय आपदा का शिकार हुआ है। बीते कुछ वर्षों में यह जिला लगातार त्रासदियों का केंद्र बनता जा रहा है:
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रैणी आपदा: भयानक सैलाब में लगभग 200 लोगों की असमय मौत।
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जोशीमठ भू-धंसाव (2023): घरों और जमीन में पड़ी बड़ी दरारें, जिसके चलते कई होटलों को गिराना पड़ा और लोगों को अपने आशियाने छोड़कर राहत कैंपों में शरण लेनी पड़ी।
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तमकनाला आपदा: हाल ही में बैली ब्रिज बह जाने से जोशीमठ-मलारी हाईवे पूरी तरह ठप हो गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और अनियोजित निर्माण गतिविधियों के कारण भूस्खलन और भू-धंसाव की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो स्थानीय निवासियों और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी हैं।
